मेरी कहानी अद्भुत थी

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मेरी कहानी अद्भुत थी
चारों ओर से पहाड़ों से घिरी थी,
हवा जो चल रही थी
वह भी कुछ गुनगुना रही थी,
जैसे प्यारा के किस्से बुदबुदा रही हो,
या संघर्ष का अध्याय खोली रही हो।
मेरे पास बहुत कुछ नहीं था,
महाभारत का अधूरा ज्ञान था
रामायण की अल्प कथा थी,
थोड़ा आकाश था
थोड़ी धरती थी,
 मुट्ठी भर सच-झूठ था।
किसी वृक्ष की छाया में बैठ
मैं बुद्ध भगवान की तरह सोचता
पर अगले ही क्षण तीक्ष्ण भूख
मुझे मथ डालती।
अनुभव लेते-लेते मैं जवान हो गया,
जीवन का अनुभव था,
जीने की तरह मरना भी एक कला है
धीरे-धीरे मैंने समझा।
प्यार के हाथों ने
जो भी गुणा-भाग किया
मेरी कहानी में जुड़ता गया,
इस बीच नदी ने कभी नहीं कहा
कि उसका सुन्दर वर्णन हो,
पहाड़ ने कभी नहीं कहा
कि उसकी ऊँचाई का बखान हो,
धरती उदार बन
हमारे गुण- दोष देखती रही।
मेरी कहानी अद्भुत है
चारों ओर से पहाड़ों से घिरी है।
#महेश रौतेला,
अहमदाबाद
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।