सस्ती ज़िन्दगी

आज आज़ाद है वतन, अंग्रेज़ों की चंगुल से,
मास्क ने लोगों की सांसों को, कैदी बनाया है।
अरमानों की बारात सजाता है, इंसाँ ज़िन्दगी में,
चला ख़ंजर ख्वाहिशों पर,रूख़सत हो गए अरमाँ।।

हाथ हाथों से मिल जाते मुस्कुराते कई चेहरे
सैनीटाइजर लगा कर भी डरे सहमे कई चेहरे
महज़ एक चारपाई पर सुकूँ की नींद मिल जाती
पैसे देकर भी,रुग्णालय का एक बेड नही मिलता।।

जिन अपनो से मिलते थे,बैठ बातें किया करते
आखिरी बार मिलने को आज जद्दोजहद करते
बुजुर्गों से नही मिलते, दुहाई वक़्त का देकर
आज उनकी ही सूरत देखने को तरसना पड़ता।।

मुफ़्त में ऑक्सीजन मिलती, मुफ़्त की सेवा पेड़ो से
आज हीरे सी कीमत है, बिकते ऊँचे दामों में
सोशल मीडिया पर विज्ञापन, शक्ल का जो किया करते
पीपीई किट में आज वही, शक्ल अक्सर छुपाते हैं।।

नही कुछ भी यहाँ अपना, हुआ वाकिब विचारों से
आज इंसान भी डर कर पिंजरे में कैदी बना रहता।
हुआ सदा गलतफहमी, उसके मर्ज़ी की दुनिया है
गुलामी उस वायरस की जिसका वजूद भी ओझल।।

जिन पैसों के बलबूते ऐशोआराम फरमाता
नही पैसों की कुछ कीमत, तभी दम तोड़ देता है
याद वह वक्त भी मुझको, आवा जाही थी सड़कों पर
आज वीरान सड़कें हैं, सहम जाता निकलते ही।

अपने संस्कार भूला था स्वार्थ की पराकाष्ठा में
तरसती है वही लाशें, अंतिम संस्कार पाने को,
यह कैसा भयावह मंज़र, जहाँ घर टूट जाते हैं
टूटकर बिखर जाना मुझे अक्सर डराती है।।

फरहाना सय्यद
सोलापुर (महाराष्ट्र)

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।