कोई गिरगिट तो कोई मौसम..

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hokamdev

कुछ लोग मेरी नज़रों से रोज़ गिरा करते हैं,
कोई गिरगिट तो कोई मौसम बनकर मिला करते हैं।

क्या जान पाएंगे वो लोग मोहब्बत का मर्ज़,
इनकी ज़िन्दगी में बिन काँटों के फूल खिला करते हैं।

चैन से बैठने नहीं देते किसी परिंदे को,
कुछ शज़र बेमतलब हिला करते हैं।

किसी के लिए कोई दुआ नहीं इनकी ज़ुबाँ पर,
ख़ुदा के दर पर भी शिकवा-गिला करते हैं।

होते रहते हैं अक्सर इनकी इज़्ज़तों के टुकड़े,
फिर इन टुकड़ों को कच्चे धागे से सिला करते हैं।

कुछ लोग मेरी नज़रों से रोज़ गिरा करते हैं..
कोई गिरगिट तो कोई मौसम बनकर मिला करते हैं।।

    #होकमदेव राजपूत

परिचय : होकमदेव राजपूत राजगढ़ जिले के ग्राम सुकली(तहसील नरसिंहगढ़) में निवास करते हैं।

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।