भौतिक समृद्धि का परिचायक रूप है सभ्यता

Read Time1Second
rajesh sharma
     सभ्यता समाज के सकारात्मक प्रगतिशील और समावेशी विकास को इंगित करने के लिए किया जाता है। सभ्यता के अंतर्गत उन्नत कृषि लम्बी दूरी का व्यापार नगरीकरण आदि की उन्नत स्थिति दर्शाता है।सभ्यता कुछ माध्यमिक तत्वों यथा विकसित यातायात व्यवस्था लेखन मापन के मानक विधि व्यवस्था कला की प्रसिद्ध शैलियां स्मारकों के स्थापत्य गणित उन्नत धातु कर्म खगोल विद्या आदि के माध्यम से पतिभाषित होती है।
   भारतीय परंपरा में समृद्ध सांस्कृतिक मूल्य है। हमारी सभ्यता बताती है कि बड़ों के चरण स्पर्श करना चाहिए। भगवान श्रीराम व उनके भाई भी अपने गुरु माता पिता के चरण स्पर्श करते थे। अपने दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते कहना ये सभी भारतीय सभ्यता के महत्वपूर्ण अंग है। महाशिवरात्रि करवा चौथ जैसे अवसरों पर उपवास किया जाता है मुस्लिम भी पवित्र रमजान माह में रोजा करते है। वैज्ञानिक तरीके से पाचन हेतु ये सब जरूरी है।अतिथि देवो भव ।मेहमानों को ईश्वर मानकर सेवा करना ये हमारी सभ्यता के अंतर्गत आता है। हमारे देश मे हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सहित सभी धर्मों के लोग शांति से एक साथ रहते हैं। सनातन धर्म ने सभ्यता को भारत मे संरक्षित रखने का कार्य किया है।
  संक्षेप में भैतिक समृद्धि का परिचायक तत्व सभ्यता है।मानव की उद्दात चित्रवृति की जो सामाजिक और आर्थिक संगठन के रूप में बहुमुखी अभिव्यक्ति हुई। उसे ही सभ्यता कहा जाता है।
  सभ्यता सामाजिक व्यवहार की व्यवस्था है।सभ्यता नागरिकता का रूप है।सभ्यता उस राह पर चलना सिखाती है जो मानव जीवन को जीवन मूल्यों से परिपूर्ण कर देता है।सभ्यता मानव के जीवन को सुखपूर्वक व्यतीत करने के लिए रहन सहन और पहनावे का प्रतीक है।
   अलग अलग देश की अलग अलग सभ्यता होती है।मनुष्य ने काफी लंबे समय तक पशुओं की तरह जीवन व्यतीत किया। जैसे जैसे उसका बौद्धिक विकास हुआ उसने पशुत्व जीवन से उठकर जीवन व्यतीत करना प्रारम्भ किया। धीरे धीरे सुसंस्कृत बन गया। मनुष्य के समाज मे ऋषि मुनि दार्शनिक कवि कलेक्ट हुए। जिन्होंने मानव जीवन कप विकास गति देने के लिए कई प्रकार के तत्वों का अन्वेषण किया। कई प्रकार के जीवन आदर्शो को खोजा।उन्होंने जीवन मे सुख के स्वरूप को पहचाना।ऐसी सामाजिक भावना को विकसित किया जिससे मानव स्वार्थ से ऊपर उठकर जिओ और जीने दो के सिद्धांत को समझने लगा। वसुधेव कुटुम्बकम की भावना को समझने लगा। इस प्रकार मानव के सामाजिक रहन सहन खान पान पहनावे को पवित्र व सुंदर बनाने का प्रयास किया।
  सर्व हितकारिणी आर्थिक व्यवस्था को निर्मित किया। समाज को एक व्यवस्था में कायम करने के लिए राजनीतिक नियमों का आर्विभाव किया। और विकास क्रम की लंबी परम्परा में भौतिक समृद्धि के रूप में घर खेती उद्योग रेल वायुयान तार रेडियो डाक आदि चीज़ों का आविष्कार किया।
  भारत मे कई सभ्यता की कहानियां है जिनमे सिंधु घाटी की सभ्यता आहड़ कालीबंगा की सभ्यता मोहनजोदड़ो की सभ्यता का वर्णन पढ़ने को मिलता है।
  हमारी वैदिक सभ्यता सबसे प्रारम्भिक सभ्यता मानी जाती है। रामायण और महाभारत दो महान ग्रंथ इन सभ्यता की देन है।
#राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
परिचय: राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ की जन्मतिथि-५ अगस्त १९७० तथा जन्म स्थान-ओसाव(जिला झालावाड़) है। आप राज्य राजस्थान के भवानीमंडी शहर में रहते हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है और पेशे से शिक्षक(सूलिया)हैं। विधा-गद्य व पद्य दोनों ही है। प्रकाशन में काव्य संकलन आपके नाम है तो,करीब ५० से अधिक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा आपको सम्मानित किया जा चुका है। अन्य उपलब्धियों में नशा मुक्ति,जीवदया, पशु कल्याण पखवाड़ों का आयोजन, शाकाहार का प्रचार करने के साथ ही सैकड़ों लोगों को नशामुक्त किया है। आपकी कलम का उद्देश्य-देशसेवा,समाज सुधार तथा सरकारी योजनाओं का प्रचार करना है।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मेरा भारत महान

Fri Jan 4 , 2019
*मेरा* भारत हो सदा,विकसित अरु गतिमान। *राष्ट्र* भक्ति  की  भावना, संविधान  सम्मान।। .                    *भारत* अपना हो सदा, दुनिया में  सिरमौर। *रखें* मान की आन को,मिल के खाएँ कौर।। .                    *तहजीबें*  ऊँची  सदा,  सत्य  अहिंसा  राह। *मजहब* समरस हैं तभी,ईश्वर अरु अल्लाह।। .                    *हाल* सभी के हों भले ,रखलें सत अभिमान। […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।