क्या इंसानियत सच में मर गयी है?

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हृद मेरा भी कंपित होता है।
हर आहट पर आशंकित होता है।
कातर चछु को मै पढता हूँ,
जो भूख तपन से नित रोता है।
स्त्री के फटे वस्त्र तले जब,
यह पागल जन चछु तन छूता है।
उद्गारित हो उठता है हृद तब,
सच धीरज आपा खोता है।
बारिस की वहाँ खुमारी क्या,
जहाँ स्वप्न बूँद रूप में चूता है।
भाई-भाई का मल्ल युद्ध,
मानव खुद मानव से छुपता है।
“फुटपाथो” पर पले जिन्दगी,
“नालो” से ही खाता पीता है।
इंसानियत का दिल दहल जाये,
जब कुहरे की चादर ले सोता है।
दूर देश का सौदा करने पर,
“खाकी-खद्दर” का न्यौता है।
गरीबी के कल-कारखाने में तब,
“हवा” बस खाने पीने में होता है।
“तन को बचाने में बदन बिका”,
“रोटी”के खातिर ही सोता है।
“सच की जुबान” आखिर यहां,
“पटाखो” में ही दब जाता है।
“खाकी” जब छींन लेती कटोरा,
तब “भिखारी” कितना रोता है।
अखबार की सुर्खी पर आहत आँखे,
कि रोज कितनो का “रेप” होता है।
“एक बूढे ने मासूम की इज्जत लूटी”,
बाइज्जत बरी क्यूँकि वह “नेता” है।
जब काट दी जाती है सच की जुबान,
मन अहक-अहक कर रोता है।
पता नही “मिलिंद” क्या लिख रहा,
बस “एहसास सत्य का” होता है।
#मिथलेश सिंह “मिलिंद” 

आजमगढ़(उत्तरप्रदेश)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।