अंग्रेजी: खट्टर ने खूंटी पर टांगी

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vaidik

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने अपने प्रदेश में एक ऐसा काम कर दिखाया है, जिसका अनुकरण देश के सभी हिंदी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को करना चाहिए। उन्होंने आदेश जारी किया है कि हरियाणा का सरकारी कामकाज अब हिंदी में होगा। जो भी अफसर या कर्मचारी अब अंग्रेजी में कोई भी पत्र या आदेश या दस्तावेज तैयार करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। खट्टर के इस हिंदी-प्रेम से कई अफसर घबराए हुए हैं। ऐसे आदेश पहले भी कई मुख्यमंत्रियों ने जारी किए हैं लेकिन उनका पालन कम और उल्लंघन ज्यादा होता रहा है। हरियाणा में ही नहीं, सभी हिंदी राज्यों में सरकारी फाइलों में ज्यादातर लिखा-पढ़ी अंग्रेजी में ही होती है। उनकी विधानसभाओं में सारे कानून अंग्रेजी में बनते हैं। उनकी ऊंची अदालतों में फैसले और बहस का माध्यम भी प्रायः अंग्रेजी ही होता है। सरकार की फाइलों में ही नहीं, उनकी सार्वजनिक घोषणाओं और विज्ञापनों में भी अंग्रेजी का बोलबाला रहता है। सभी हिंदी राज्यों के स्कूलों और कालेजों में अंग्रेजी अनिवार्य है। उच्च शिक्षा और शोध-कार्य भी अंग्रेजी में ही होते हैं। सरकारी दफ्तरों और शहरों में नामपट भी प्रायः अंग्रेजी में ही टंगे होते हैं।

पता नहीं, खट्टरजी कितनी सख्ती से पेश आएंगे और ऊपर बताए सभी स्थानों पर हिंदी चलवाएंगे ? हरियाणा का पूर्ण हिंदीकरण हो जाए तो देश के सभी प्रांतों को स्वभाषा के इस्तेमाल की प्रेरणा मिलेगी। पंजाब में चले हिंदी आंदोलन के कारण हरियाणा का जन्म हुआ। 1957 में याने अब से 62 साल मैंने इसी आंदोलन के तहत पटियाला की जेल भरी थी। हिंदी के नाम पर बने इस प्रदेश का सारा काम हिंदी में नहीं होगा तो किसी प्रांत में होगा ?

मेरे आग्रह पर स्व. भैरोसिंहजी शेखावत ने मुख्यमंत्री के तौर पर 35-40 साल पहले राजस्थान में एक कठोर नियम बनाया था। वह यह कि राजस्थान के प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को हर दस्तावेज पर हिंदी में ही दस्तखत करने होंगे। इस नियम का पालन समस्त हिंदी-राज्यों के अलावा केंद्र सरकार में भी होना चाहिए लेकिन हमोर अधपढ़ नेता अंग्रेजी के गुलाम हैं। उनमें खुद इतनी हिम्मत नहीं कि वे अपने हस्ताक्षर स्वभाषा में करे। वे दूसरों से यह आग्रह कैसे करेंगे ? मैं किसी भी विदेशी भाषा का विरोधी नहीं हूं। मैंने स्वयं कई विदेशी भाषाएं सीखी हैं लेकिन मैं अपनी भारतीय भाषा को नौकरानी बनाकर किसी विदेशी भाषा को महारानी बनाने के विरुद्ध हूं। अंग्रेजी की दिमागी गुलामी में हमारी जनता और नेता, सभी डूबे हुए हैं। यदि खट्टरजी थोड़ी भी कोशिश करें और वह थोड़ी भी सफल हो जाए तो गनीमत है। खट्टर ने अंग्रेजी को खूंटी पर टांग दिया है।

#डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।