जन्नत के बहाने

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rupesh jain

जन्नत के बहाने

क्यों दोज़ख़ की तरफ़ ले जाते हो

ए जिहाद वालों

क्यों तुम मासूमो को बरगलाते हों।

बताओ कौन से ख़ुदा ने कहा है

पाक है क़त्ल-ए-इंसाँ

ख़ुदाई में वो अपनी

मोहब्बत करने को तुमसे कहता है।

हूर की बात तुम करते हो

जो जन्नत में मिलेगी

पर क्यों छुपाते हो, दोज़ख़ भी न मिलेगा

इस ख़ूनी खेल के बाद।

इशरत-ए-इंसाँ है

मोहब्बत में मिट जाना

फिर क्यों नफ़रत में जल के

औरों को जलाते हो।

साजिशों में क्या रखा हैं

गुनाहों के अलावा

क्यों तुम इस कायनात में

गड़बड़ी फैलाते हो।

फ़राइज़ तले गुज़ारिश है

तुमसे जिहाद वालों

छोड़कर राह-ए-कुफ़्र

अमन से ज़िंदगी बिता लो।

#डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।