पूछिए मत क्या बवाल मचा रखा है जाने उसने ज़बाँ पे क्या छुपा रखा है इस माहौल में ख़ामोश रहना अच्छा बहस को जाने क्या मुद्दआ उठा रखा है तमाम उम्र जिस मुल्क से प्यार किया फ़िक्र है मुझे अजनबियों ने डरा रखा है आसार नहीं कोई दिखता सुधरने का […]

पूछिए मत क्या बवाल मचा रखा है जाने उसने ज़बाँ पे क्या छुपा रखा है इस माहौल में ख़ामोश रहना अच्छा बहस को जाने क्या मुद्दआ उठा रखा है तमाम उम्र जिस मुल्क से प्यार किया फ़िक्र है मुझे अजनबियों ने डरा रखा है आसार नहीं कोई दिखता सुधरने का इन हालातों की चिंता ने सता रखा है नहीं पता किस मोड़ पे नज़ारे अच्छे हों हम ने देखा चोरों ने पेट भर खा रखा है कहाँ तक पहुँचे निगाह होश भी न रहा हम चुप और मुद्दई ने घर सजा रखा है कब तक रहेगा ये मौसम इस सफ़र में ‘राहत’ हम जैसों ने वतन बचा रखा है #डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ Post Views: 7

आँखों में सँभालता हूँ पानी आया है प्यार शायद ख़ुशबू कैसी, झोंका हवा का घर में बार बार शायद रात सी ये ज़िंदगी और ख़्वाब हम यूँ बिसार गए बार बार नींद से जागे टूट गया है ए’तिबार शायद सिमटके सोते हैं अपने लिखे ख़तों की सेज बनाकर माज़ी की यादों से करते हैं ख़ुद को ख़बरदार शायद कुछ रोज़ की महफ़िल फिर ख़ुद से ही दूर हो गए लम्बी गईं तन्हाई की शामें दिल में है ग़ुबार शायद हमारा दिल है कि आईना देख के ख़ुश हुआ जाता है सोचता है वो आये तो ज़िंदगी में आये बहार शायद उठाए फिरते हैं दुआओं का बोझ और कुछ भी नहीं वक़्त में अब अटक गए हैं हौसले के आसार शायद सारी उम्र इन्तिज़ार करें तो कैसे बस इक आहट की अरमाँ तोड़ने का ‘राहत’ करता है कोई व्यापार शायद #डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ Post Views: 3

मचलती तमन्नाओं ने आज़माया भी होगा बदलती रुत में ये अक्स शरमाया भी होगा पलट के मिलेंगे अब भी रूठ जाने के बाद लड़ते रहे पर प्यार कहीं छुपाया भी होगा अंजाम-ए-वफ़ा हसीं हो यही दुआ माँगी थी इन जज़्बातों ने एहसास जगाया भी होगा सोचना बेकार जाता रहा बेवजह […]

काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती परिणय की परिपाटी में तुम पर न्यौछावर हुआ तुम्हें अपना वर्तमान और भविष्य माना हर पग तेरे साथ चलने की कोशिश की, तुम में ही अपना सर्वस्व ढूँढा काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। हर रात उठ-उठ कर तेरे चेहरे में ख़ुद को ढूँढा हर सुबह उठ कर तेरे सोते हुये चेहरे का अजब सा मुँह मोड़ना देखकर ख़ुश हुआ तेरे बालों की महक से तेरी थकान का अंदाज़ा लगा सकता हूँ तेरे चेहरे की शिकन से तेरा मूड बता सकता हूँ काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। हालांकि गुलाबी शूट और बैंगनी साड़ी तुम पे जचती है गुलाब की चार पंखुड़ियाँ तेरी मुस्कान बढ़ाती हैं सूरज की कुछ ही किरणों में तुम थक जाती हो हवा के चंद झोंकों में ठण्ड से डर जाती हो काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। घर के किसी भी कोने में जब तुम होती हो क्या महसूस किया तुमने, हर थोड़ी देर में तुम्हें देख जाता हूँ काली टी-शर्ट में तेरा सोता हुआ फोटो देख कर आज भी चहक जाता हूँ सेवपुरी के दो टुकड़ों में तेरी मुस्कान अब भी दिखती है काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। रेड लेबल चाय का बड़ा डिब्बा तेरे बड़े से मग की याद दिलाता है मेरी कॉफ़ी का १० रूपये वाला पाउच अब भी तेरे चाय के डब्बे से शर्माता है मैरून रंग की वाशिंग मशीन से जब फर्श पर पानी फैलता है और डबल बेड की सरकती ट्रॉली तेरी याद दिलाती है काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। तेरा छोटा सा डस्ट-बिन खाली पड़ा है पुरानी कॉलेज की बॉय-कट बालों वाली फोटोज और फाईलें वैसी ही पड़ी हैं तेरी तकिया से वही ख़ुशबू आती है तेरे टेडी तेरी याद दिलाते हैं काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती।   #डॉ. रुपेश जैन ‘राहत’ Post Views: 8

ज़िंदगी अब इक तंज़ बन के रह गई बिन तेरे दुनिया रंज बन के रह गई नाख़ुदा कौनसी स्याही से मानेगा अश्कों का रंग भी अब सुर्ख़ हो गया बिखर गया हूँ कुछ इस तरह से कि इक टुकड़ा फलक पे दुसरा ज़मीं-दोज़ हो गया रह रह के देखता हूँ मुड़ के पीछे बवंडर लूट के मुझे ख़ामोश हो गया #डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ Post Views: 4

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।