शिक्षक साधारण नही प्रकाशमान हैं

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नवाचारों में अग्रणी
सुविचारों का धनी
इरादों में हिमालय
ह्रदय से प्रशांत
विजय से विक्रांत
राधाकृष्णन जैसा शांत होता है शिक्षक ।

युधिष्ठिर जैसा धर्मी
भागीरथ जैसा कर्मी
कर्ण जैसा दानवीर
अर्जुन जैसा लक्ष्य चीर
चाणक्य जैसा बुद्धिमान होता है शिक्षक ।

पत्थरों में शिल्पकार
कच्ची मिट्टी का कुम्हार
सूक्ष्मता में स्वर्णकार
कल्पनाओं से चित्रकार
समाज का दर्पण होता है शिक्षक ।

इमारतों में इबारत
पत्थरों मे पारस
पक्षियों में सारस
रसों में मधुरस
फलों में श्रीफल
झरनों में कल-कल
गंगाजल -सा पवित्र होता हैं शिक्षक ।

समरसता का प्रतीक
राष्ट्रीय एकता का दीप
शिष्य के लक्ष्य का पथिक
मोतियों से भरी जिसकी सीप
ऐसा व्यक्तित्व कोई साधारण नही
ज्ञान का प्रकाशमान होता हैं शिक्षक ।।

गोपाल कौशल
नागदा जिला धार म.प्र.

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।