होली ..

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naveen jain

फागुन का महीना है,उड़ रहा है अबीर,
होली का पर्व है रे,मनवा हुआ अधीरl

चले पिचकारी सारा रा,
होली है आरा रारा राl

इस होली के पर्व को,बड़े मौज से मनाएँ,
होली होय गुलाल की,पानी ाएँ

उड़े गुलाल सारा रा
होली है आरा रारा रा —

होली के रंगों से सीखो सामंजस्य बनाना
संगठित रहना, पर जीवन में खुशियाँ लाना
मचे हुड़दंग सारा रा
होली है आरा रारा रा——-

होली है श्रृंगार की , हास्य भी संग हो जाय
अद्भुत दिखता मनु गहरा जब रंग हो जाय

गहरा चढ़े रंग सारा रा
होली है आरा रारा रा —–

केमिकल रंगों से बचें, जैविक रंग लगाएँ
सेहत की रक्षा के लिए , जागरूक हो जाएँ

जैविक रंग हो सारा रा
होली है आरा रारा रा ——

रंगों का पर्व पावन, अराजकता न फैलाएँ
चली आ रही कुरीतियों को, सभी मिटाएँ

मिटें कुरीतियाँ सारा रा
होली है आरा रारा रा ——–

बच्चों संग होली खेलें , बच्चों संग हो जाएँ
बुरा न मानो होली है का सिद्धांत अपनाएँ

बुरा न मानों सारा रा
होली है आरा रारा रा——

   #नवीन कुमार जैन 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।