मैं तेरा जीवन बन जाऊं तू मेरा जीवन बन जा,
मैं तेरा साधक बन जाऊं तू मेरा साधन बन जा।
साँझ-सबेरे हर महफ़िल में,करता रहूँ तेरे चर्चे,
मैं तेरा वाचक बन जाऊं तू मेरा वाचन बन जा।
तुझसे ही मेरी कविता है,तुझसे ही मेरे नगमे,
मैं तेरा गायक बन जाऊं,तू मेरा गायन बन जा।
मस्त बहारों के मौसम में,जैसे कोई झूम रहा,
मैं तेरा बसंत बन जाऊं,तू मेरा सावन बन जा।
देख के जिसमें सारी दुनिया जान सके हम दोनों को,
मैं तेरा दरपन बन जाऊं,तू मेरा दरपन बन जा।
#आनंद कुमार पाठक
परिचय: आनंद कुमार पाठक का निवास शहर बरेली के शास्त्री नगर(इज़्ज़त नगर) में है। आपकी जन्मतिथि-४ फरवरी १९८८ तथा जन्म स्थान-बरेली(उत्तर प्रदेश)है। एम.बी.ए. सहित एम.ए.(अर्थशास्त्र) की शिक्षा ली है। नौकरी आपका कार्यक्षेत्र है। आपकॊ पढ़ाई में उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक मिलना बड़ी उपलब्धि है। लेखन का उद्देश्य-साहित्य में विशेष रुचि होना है।