वो शैतान बच्चा

anupa harbola

बात सिर्फ एक महीने पहले की है,मेरे पति जिस कंपनी में कार्य करते थे उसी कंपनी द्वारा संचालित स्कूल में, मैं पढ़ाती थी। मेरे पति को दूसरी जगह से ऑफर मिला तो उन्होंने वहाँ त्यागपत्र दिया,पति के साथ मुझे भी अपनी नौकरी से त्यागपत्र देना पड़ा। तीन महीने के नोटिस पीरियड की समाप्ति पर ही मुझे रिलीव किया जाना था तो मैंने तीन महीने पूर्व त्यागपत्र दिया और स्कूल प्रशासन से अनुरोध किया कि वे इस बात को ज़ाहिर न करें,पर आग़ लगने पर शांति कैसे रहेगी,ये बात सबको पता चल ही गई।
मैं बोर्ड क्लास को पढ़ाती थी तो बच्चो से मैंने अनुरोध किया कि वो भी मेरा साथ दे सिलेबस पूरा करने में।
समझदार बच्चो की तरह बच्चो के सहयोग से मैंने अपना कार्य पूरा किया।
समय आगे जाता ही है,मेरे जाने की २७ तारीख भी आने लगी।विदाई समारोह मुझे और मेरे पति को मिलने लगे…
स्कूल की तरफ से भी मुझे भी विदाई मिली ,उस स्कूल का नियम था कि जाने वाले को परिवार सहित बुलाया जाता है,मेरे पति भी मेरे विदाई समारोह में आए।नियम के अनुसार कुछ कुछ लोग मेरे बारे में अच्छा अच्छा बोल रहे थे।फिर बच्चो की भीड़ में से एक हाथ उठा , वो हाथ था स्कूल के सबसे बिगड़े बच्चे का।उसे बोलने को बोला गया,वो माइक के पास आया। उसने अपने व्यवहार के अलग सबको नमन किया,और बात की शुरुवात मेरे पति को संबोधित करते हुए की।
“सर,आप इस दुनिया के सबसे बुरे इंसान हो,मुझे आपसे नफरत है।” सब हक्के बक्के रह गए,मुझे भी अजीब लगा।
उसकी बात सुनकर मेरे पति उसके पास गए उसका हाथ पकड़ कर बोले, “क्यों नफरत है तुम्हे मुझसे?”
उसका उत्तर चौंकाने वाला था…
“सर आप तो जा रहे हो पर जिस इंसान से मैं सबसे ज्यादा प्यार करता हूँ उसे भी आप अपने साथ ले जा रहे हो, अपनी माँ के जाने के बाद जिसमें मैंने माँ को पाया आज वो भी जा रही है”,ऐसा बोल कर वो फूट फूट कर रोने लगा ।सभागार में बैठे सभी लोगों की आंखे नम हो गई।मैंने तुरंत उसे गले लगा लिया,वो मुझसे लिपट कर ऐसे रोया जैसे कोई छोटा बच्चा रोता है।
अभी इस संस्मरण को लिखते समय मेरी आंखे फिर भीग गई।

#अनूपा हरबोला
विद्यानगर (कर्नाटक)

matruadmin

Next Post

पाती 

Fri Aug 31 , 2018
हे ! सी•एम•पी•एम• महराज आप को सादर नमन। मैं एक छोटे से गॉव का एक छोटा सा किसान हूं। मैं अपने बाल -बच्चों को खेती -किसानी से पाल- पोस रहा था, पर इधर एक समस्या से अब मैं घिर गया हूं। जब मैं रात को सोता हूं, तो मुझे अजीब-गरीब […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।