“मम्मा!  जब मैं पैदा हुई थी तो आपको अच्छा लगा था कि गंदा?” होमवर्क करते-करते दस वर्षीय रावी ने पूछा। “गंदा क्यों? घर  में सबको बहुत अच्छा लगा था, सबको एक प्यारी सी डॉल जो मिल गयी थी, दादू ने तो पूरे अस्पताल को अपनी फ़ेवरेट मिठाई खिलाई थी और […]

“मम्मा! नाना जी का कॉल आया था,” वॉकिंग से लौटी गीता से घर में घुसते ही तनुज ने कहा। “क्या कह रहे थे नानाजी?” “मेरे फोन उठाने तक तो कट गया, मुझे पासवर्ड नहीं पता तो कॉल बैक भी नहीं कर पाया,” फोन में पासवर्ड डालने की भड़ास को ज़ाहिर […]

कभी-कभी ज़िन्दगी के सफर में हमें ऐसे लोग मिल जाते हैं, जिनसे मिलकर ऐसा लगता है शायद भगवान ने उन्हें हमारे लिए ही इस दुनिया में लाया है… अभी कुछ दिन पूर्व ही मुझे एक बहुत प्रतिष्ठित संस्था के साथ जुड़ने का मौका मिला जो शिक्षा के क्षेत्र में नए […]

गीता जब छुट्टियों में इस बार अपने ससुराल गई तो उसने अपने  देवर को बात-बात पर घर पर सभी पर चिल्लाते हुए पाया।ऐसा लगता था मानो बीबी और माँ पर चिल्लाए बैगर तो उसका खाना ही नहीं पचता।गुस्सैल होने के कारण ही उसने तैश में आकर  एक दिन अपनी लगी […]

“आज रेखा कहाँ रह गईं?” लाइम सोडा पीते हुए अंजू बोली। कहाँ रहेगी रेखा? किट्टी पार्टी तो रेखा की जान है, ये रही रेखा,” सोफे पर बैठते हुए रेखा बोली। “ये मिठाई किस लिए?”  रेखा के हाथ में डिब्बे देख अंजू ने पूछा। “ये मिठाई तुम सबके लिए, लो मुँह […]

बात सिर्फ एक महीने पहले की है,मेरे पति जिस कंपनी में कार्य करते थे उसी कंपनी द्वारा संचालित स्कूल में, मैं पढ़ाती थी। मेरे पति को दूसरी जगह से ऑफर मिला तो उन्होंने वहाँ त्यागपत्र दिया,पति के साथ मुझे भी अपनी नौकरी से त्यागपत्र देना पड़ा। तीन महीने के नोटिस […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।