पाती 

suresh sourabh

हे ! सी•एम•पी•एम• महराज आप को सादर नमन।
मैं एक छोटे से गॉव का एक छोटा सा किसान हूं। मैं अपने बाल -बच्चों को खेती -किसानी से पाल- पोस रहा था, पर इधर एक समस्या से अब मैं घिर गया हूं। जब मैं रात को सोता हूं, तो मुझे अजीब-गरीब सपने आने लगतें हैं। मैं देखता हूं चारो ओर से तमाम गाय- बैल-सॉड मुझे हुडे़स रहे होते हैं। तब मैं परेशान हो जाता हूं। छटपटाता हूं। जोर-जोर से हॉफता हूं । फिर सारी-सारी रात अजीब बेचैनी में नींद नहीं आती है । अजीब उलझन से जोर-जोर से छाती उछलने लगती है।  सुबह उठकर जब अपने खेत देखने जाता हूं ,तो देखता हूं वही सपनो वाले गाय-बैल-सॉड सब मेरा खेत चर रहे होतें हैं। मैं इन्हें भगा -भगा कर बहुत तंग हो चुका हूं। अाधा हो चुका हूं। मेरा जीना मुहाल हो चुका है ,पर ये किसी भी कीमत पर भागने को तैयार नहीं। किससे अपनी फरियाद करूं ? कोई सुनने को तैयार नहीं। सभी इन अावारा जानवरों को ईश्वर का आवास बता रहें हैं। मैं क्या करूं हे ! महानुभावों हमारे परिवार का खाना-पीना दूभर हो गया है।
हे ! देश, राज्य और धर्म के रक्षको मेरी तकलीफ दूर करो, वर्ना मैं टोपी वाला धर्म अपनाकर इन्हें मार -मार कर खाने लगूंगा। फिर अाप कहते रहना, इसका साथ ,उसका साथ जनता का विकास।

           #सुरेश सौरभ 

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कान्हा

Fri Aug 31 , 2018
मेरो छोटो सो *कान्हा* देखो कैसे मुसकाय रहो री चुप चुप माखन खाय के देखो कैसे मुँह छपाय रहो री जैसेही देखो मात यशोदा को इत उत लुक़त फिर रहो री नन्द बाबा के डर से देखो कान्हा घर में न आय रहो री गोप ग्वाल संग नदिया तीरे बैठ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।