“दहेज”

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keshav

दहेज मांगकर हम ये कर रहे हैं,
ना खुद जी रहे!ना मर ही रहे हैं,
सभी जानते!अभिशाप है ये,
जो माफ न हो!वो पाप है ये,
इस आग में बहुत घर जल रहे हैं
बच्चियाँ तो कोख में ही मर रही हैं,
न जाने फिर क्यों!वही कर रहे हैं,
ना खुद जी रहे!ना मर ही रहे हैं।
ये माना दहेज एक प्रथा बन गयी है,
मस्तिष्क की एक व्यथा बन गयी है,
लेकिन!
है हमने सती की प्रथा को भी तोड़ा,
है हमने बाल-विवाह को भी छोड़ा,
विधवा विवाह को है हमने ही जोड़ा,
है छुआछूत की बुराई को भी छोड़ा,
फिर क्यों न दहेज की प्रथा को तोड़ें,
इस कोढ़ को क्यों न खत्म कर ही छोडें,
अजन्मी के जन्म की खुशियाँ मनाएँ,
दहेज के बन्धन से सब मुक्त हो जाएँ,
किसी के घर को हम कभी न उजारें,
खुद खुश रहें सबको खुशियाँ दिलायें,
दहेज को हम सभी मिलकर मिटाएँ,
न दहेज लेकर मैं तो आगे बढ़ रहा हूँ,
उसी राह पर सबकी बाट जोह रहा हूँ,
अब क्यों रुक गए!अब आगे बढ़ो न,
कुछ कदम हम चले!तुम भी चलो न,
अब इस कोढ़ को मिटाना है हमको,
दहेज मुक्त समाज बनाना है हमको।
दहेज मुक्त समाज बनाना है हमको।।(इति)।।
   #केशव कुमार मिश्रा

 परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।