
इंदौर। मालवा की धरती से राष्ट्रवाद के स्वर को देशभर में पहुँचाने वाले राष्ट्रीय कवि सत्यनारायण सत्तन की कृति ‘मन मालव’ का लोकार्पण रविवार 5 अप्रैल को श्रीमध्यभारत हिंदी साहित्य समिति में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्र शर्मा रहे और अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यकांत नागर ने की व पुस्तक पर चर्चा डॉ. पुष्पेंद्र दुबे ने की।
डॉ. पुष्पेंद्र दुबे ने कहा कि ‘पाठक को ‘मन मालव’ में मंचीय कवि सत्तनजी नहीं मिलेंगे, इसे पढ़ने के बाद ज्ञात होता है कि मालवा के प्रति सत्तनजी कितने आग्रही हैं।’
डॉ. शैलेन्द्र शर्मा ने कहा कि ‘भारतीय साहित्य का प्रतिनिधित्व गंगा से नर्मदा के बीच हो रहा है, ऐसे प्रतिनिधित्व में सत्तन जी की रचनाओं से गुज़रना युगप्रवाह से गुज़रना है। वे युग का प्रतिनिधित्व स्वर हैं।’
आयोजन में सैंकड़ों लोगों की महनीय उपस्थिति रही।

