फुर्सत

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atul sharma

फुर्सत तेरा कैसा रंग ?
फुर्सत तेरा कैसा है ढंग ?
लाल,नीली,काली,नारंगी,
सुराही,घड़ा या जैसे सारंगी।

बता दे पता अपने निवास का,
तेरा घर है जरूर घास का।
जिससे निकलना तुझे है मुश्किल,
लेकिन तेरे बिन मैं होता व्याकुल।
तेरी कुटिया के बाहर है लक्ष्मण रेखा,
अरे! फुर्सत को किसने देखा ?

जो घर से बेफिक्र होते हैं,
या फिर अपने जीवन से निराश होतेे हैं।
दिमाग में कोई डर नहीं है,
या फिर गाँव में उसका घर नहीं है।
जो नहीं संकटों से परेशान,
उसे फुर्सत मिलना बहुत आसान।
फुर्सत के चहेते बर्बाद हो गए,
और इसके दुश्मन आबाद हो गए।
ये है मीठा और छिपा धोखा,
अरे! फुर्सत को किसने देखा ?

तेरा कौन शहर में लगता बाजार,
जो करे मेरे सपनों को साकार।
तेरी कीमत महंगी है या सस्ती,
मैं क्या जानूँ तेरी हस्ती।
मेरी न हुई तुझसे मुलाकात,
तेरे चहेतों की है भारी तादात।
अपने दर्शन करा मुझ पर कर तरस,
तेरे मिलने में न जाने लगेंगे कितने बरस ?
जब तू मिलेगी तो मुझे होगा अपार हर्ष,
इस अतुल कविता का यही है निष्कर्ष।
मेरी इस विनती को तू न करना अनदेखा,
अरे! फुर्सत को किसने देखा ?

                                                       #अतुल कुमार शर्मा

परिचय:अतुल कुमार शर्मा की जन्मतिथि-१४ सितम्बर १९८२ और जन्म स्थान-सम्भल(उत्तरप्रदेश)हैl आपका वर्तमान निवास सम्भल शहर के शिवाजी चौक में हैl आपने ३ विषयों में एम.ए.(अंग्रेजी,शिक्षाशास्त्र,समाजशास्त्र)किया हैl साथ ही बी.एड.,विशिष्ट बी.टी.सी. और आई.जी.डी.की शिक्षा भी ली हैl निजी शाला(भवानीपुर) में आप प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैंl सामाजिक क्षेत्र में एक संस्था में कोषाध्यक्ष हैं।आपको कविता लिखने का शौक हैl कई पत्रिकाओं में आपकी कविताओं को स्थान दिया गया है। एक समाचार-पत्र द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है। उपलब्धि यही है कि,मासिक पत्रिकाओं में निरंतर लेखन प्रकाशित होता रहता हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को उजागर करना हैl 

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