फुर्सत

8
Read Time3Seconds

atul sharma

फुर्सत तेरा कैसा रंग ?
फुर्सत तेरा कैसा है ढंग ?
लाल,नीली,काली,नारंगी,
सुराही,घड़ा या जैसे सारंगी।

बता दे पता अपने निवास का,
तेरा घर है जरूर घास का।
जिससे निकलना तुझे है मुश्किल,
लेकिन तेरे बिन मैं होता व्याकुल।
तेरी कुटिया के बाहर है लक्ष्मण रेखा,
अरे! फुर्सत को किसने देखा ?

जो घर से बेफिक्र होते हैं,
या फिर अपने जीवन से निराश होतेे हैं।
दिमाग में कोई डर नहीं है,
या फिर गाँव में उसका घर नहीं है।
जो नहीं संकटों से परेशान,
उसे फुर्सत मिलना बहुत आसान।
फुर्सत के चहेते बर्बाद हो गए,
और इसके दुश्मन आबाद हो गए।
ये है मीठा और छिपा धोखा,
अरे! फुर्सत को किसने देखा ?

तेरा कौन शहर में लगता बाजार,
जो करे मेरे सपनों को साकार।
तेरी कीमत महंगी है या सस्ती,
मैं क्या जानूँ तेरी हस्ती।
मेरी न हुई तुझसे मुलाकात,
तेरे चहेतों की है भारी तादात।
अपने दर्शन करा मुझ पर कर तरस,
तेरे मिलने में न जाने लगेंगे कितने बरस ?
जब तू मिलेगी तो मुझे होगा अपार हर्ष,
इस अतुल कविता का यही है निष्कर्ष।
मेरी इस विनती को तू न करना अनदेखा,
अरे! फुर्सत को किसने देखा ?

                                                       #अतुल कुमार शर्मा

परिचय:अतुल कुमार शर्मा की जन्मतिथि-१४ सितम्बर १९८२ और जन्म स्थान-सम्भल(उत्तरप्रदेश)हैl आपका वर्तमान निवास सम्भल शहर के शिवाजी चौक में हैl आपने ३ विषयों में एम.ए.(अंग्रेजी,शिक्षाशास्त्र,समाजशास्त्र)किया हैl साथ ही बी.एड.,विशिष्ट बी.टी.सी. और आई.जी.डी.की शिक्षा भी ली हैl निजी शाला(भवानीपुर) में आप प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैंl सामाजिक क्षेत्र में एक संस्था में कोषाध्यक्ष हैं।आपको कविता लिखने का शौक हैl कई पत्रिकाओं में आपकी कविताओं को स्थान दिया गया है। एक समाचार-पत्र द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है। उपलब्धि यही है कि,मासिक पत्रिकाओं में निरंतर लेखन प्रकाशित होता रहता हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को उजागर करना हैl 

11 0

matruadmin

8 thoughts on “फुर्सत

  1. मेरी इस रचना को 500से भी अधिक लोगों ने देखा और पसन्द किया, सभी लोगों का हार्दिक आभार।

  2. सम्पादक जी, मुझे अपना व्हाटस अप नंबर भेज दें तो मैं और भी कुछ मौलिक रचनाएँ दे सकता हूं। मेरा नं 08273011742

  3. इस नंबर पर अपना कुछ संदेश भेजने का कष्ट करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

राहुल,जीएसटी और सरकार

Sat Nov 11 , 2017
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के गुजरात दौरे से केन्द्र की भाजपा सरकार में हड़कम्प मचा हुआ है। ‘जीएसटी’ में बदलाव इसकी ताज़ा मिसाल है। पिछले दिनों राहुल गांधी ने गुजरात में जीएसटी के मौजूदा स्वरूप में बदलाव करने का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि साल २०१९ के लोकसभा […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।