पावस के दिन

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meera chourasiya
पावस के दिन आये।
कारे- कारे कजरारे से,
                     मेघ गगन पर छाये ।
                     पावस के दिन आये।।
चम-चम चपला चमक रही है,
मेघ    उसाँसें     भरते      हैं ।
इत उत  गोरी  उड़ती  फिरती,
अंचल   से   मोती  झरते   हैं।।
                    उड़ते फिरते नभ उपवन में,
                     गीत     सुहाने        गाये ।।
रूप अनूठा अपना लेकर,
बरखा रानी जग आँगन में ।
सुख वैभव बिखराती फिरती,
वसुधा के जन मन में ।।
                          जनमानस को अपने जल से,
                          यह  हरिताभ     बनाये ।।
धरा हुयी समृद्ध नहीं है,
कोई दु:ख उसके आँचल में।
पग-पग पर फैली हैं खुशियांँ,
हँसी – खुशी है ग्राम्यांचल में।।
                              खोले हैं भण्डार सुखों के,
                               मन्द-मन्द मुस्काये ।।
नाम        मीरा चौरसिया
पति        श्री परमसुख चौरसिया 
पिता       डॉ  शिव राम चौरसिया
माता        सावित्री देवी
जन्म स्थान    लखनऊ  (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा        एम ए  एल टी
अन्य        काव्य व ग़ज़ल रचना 
पता         लखनऊ  उ. प्र.

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।