मेरा तीर्थ

1 0
Read Time1 Minute, 49 Second

“सुना है कि तुम तीर्थ पर गए थे ?”

“सही सुना है तुमने “

“कौन से तीर्थ पर गए थे ?”

“गांव ।”

“गांव ! गांव कोई तीर्थ होता है क्या ?”

“हाँ…”

“वो कैसे ?”

“क्योंकि वहाँ मेरे माता-पिता रहते हैं।”

राम मूरत ‘राही’,

इन्दौर

परिचय-

नाम — राम मूरत ‘राही’
लेखन –बाल कहानियाँ, लघुकथाएँ, गज़लें, लेख, कविताएँ, व्यंग्य इत्यादि।

प्रकाशन — देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में।

संग्रह/संकलन — एकल लघुकथा संग्रह ‘अंतहीन रिश्ते’, एक साझा लघुकथा संकलन एवं दो साझा कविता संकलन।
पुरस्कार/सम्मान — अखिल भारतीय माँ शकुंतला कपूर स्मृति लघुकथा प्रतियोगिता (हरियाणा) में, ‘श्रेष्ठ लघुकथा’ का पुरस्कार। क्षितिज साहित्य मंच, इंदौर व्दारा ‘लघुकथा विशेष उपलब्धि सम्मान’। पत्र लेखक मंच जावरा (मप्र) व्दारा सर्वाधिक पत्र लेखन का पुरस्कार। श्री माणिकचन्द्र वाजपेई (मामाजी) पत्र लेखन सम्मान (इंदौर)। नईदुनिया (इंदौर) में दो बार एवं दैनिक ट्रिब्यून (चंडीगढ़) में एक बार पुरस्कृत पत्र प्रकाशित।
संप्रति — म.प्र.पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से अति.कार्या.सहा.– दो के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त।स्वतंत्र लेखन।
इंदौर(मध्यप्रदेश)

matruadmin

Next Post

अनंत किस्सा

Mon Mar 16 , 2020
दरअसल किस्सा वहीँ से शरू हुआ जब प्रेम में भीगे दो मनुष्यों का मिलन हुआ और आबाद होने लगी ये दुनिया दो पत्थरों का प्रेम ही था वह शायद जो चमक उठा था घर्षण के साथ आँसुओं के निर्माण से पहले आक्सीजन और हायड्रोजन में भी प्रेम की आहट हुई […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।