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शक्ति स्रोत हे युवा मण्डल,तत्क्षण होश में आओ,
काल गया अब सोने का,जागो औरों को भी जगाओ।

युग जननी अकवार पसारे,कब से करती आह्वान,
संग उठो फौलादी हाथों से,संभालो माँ का दामन।

संभालो माँ का दामन,कहीं यह उड़ न जाए,
पुनः गुलामी के शिकंजे,तुम्हें जकड़ न जाए।

देश में फैली उथल-पुथल,तरस के हम पर हँसती,
जिस देश में ऐसे युवा हैं,वहाँ अव्यवस्था मस्ती करती।

शक्ति माँग ईश्वर से अपार,बैठे हो घरों के अंदर,
साहस शौर्य पराक्रम भूलकर,क्या देखते हो अम्बर।

भूकंप छोटा हो जाता है,अपने उपद्रव के आगे,
देख के अपना साहस,काल आगे हमारे भागे।

यदि एक संग हो जाएं,तो दुनिया को बस में कर लें,
सदृश वराह के स्वयं भू को,नासिका पर अपनी धर लें।

सिंहों के संग खेलें हम,अजगर को बस में कर लें,
गिद्धों की परवाज़ भरें हम,सुमेरु हथेली पर धर लें।

देश को आवश्यकता है तुम्हारी, अपना फर्ज़ निभाओ,
शक्ति स्रोत हे युवा मण्डल,तत्क्षण होश में आओ।

                                                              #सुमित अग्रवाल

परिचय : सुमित अग्रवाल 1984 में सिवनी (चक्की खमरिया) में जन्मे हैं। नोएडा में वरिष्ठ अभियंता के पद पर कार्यरत श्री अग्रवाल लेखन में अब तक हास्य व्यंग्य,कविता,ग़ज़ल के साथ ही ग्रामीण अंचल के गीत भी लिख चुके हैं। इन्हें कविताओं से बचपन में ही प्यार हो गया था। तब से ही इनकी हमसफ़र भी कविताएँ हैं।

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