जनरल की हत्या से अमेरिकी मानसिकता उजागर।

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ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की सेना के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी को इराक में बगदाद हवाई अड्डे पर अमेरिकी हवाई हमले के दौरान मार दिया गया अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है राष्ट्रपति के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने कासिम सुलेमानी की हत्या करके निर्णायक रक्षात्मक कार्रवाई की है। जबकि सत्य यह है कि लंबे समय से अमेरिका ईरान पर अपना प्रभाव बनाने के लिए लगातार दबाव बना रहा है। जोकि जगजाहिर है। अमेरिका के विरूद्ध सुलेमानी ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने ईरान के मध्य पूर्वी क्षेत्र को स्थापित किया। और ईरान को अधिक मजबूत किया।
जनरल सुलेमानी एक बहुत ही निम्न परिवार में जन्में थे उनका जन्म 1957 में करमन प्रांत में एक किसान परिवार में हुआ था 1979 की क्रांति के बाद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में शामिल होने से पहले वह एक कंस्ट्रक्शन से सम्बन्धित मेहनत का कार्य करते थे। 1988 में आठ वर्षीय ईरान-इराक युद्ध समाप्त होने के बाद तेहरान ने पूरे क्षेत्र में प्रभाव स्थापित करने के लिए नए दोस्त की खोज शुरू की सुलेमानी तेहरान मध्य पूर्वी विदेश और सुरक्षा नीति के प्रमुख नीतिकार थे। सुलेमानी अमेरिका की चाटुकारी से बहुत नफरत करते थे इसी कारण सुलेमानी की सऊदी अरब से नहीं बनती थी क्योंकि सउदी अरब अमेरिका की चाटुकारी में लगा रहता है जिसके सुलेमानी घोर आलोचक थे। सुलेमानी का मानना था कि चाटुकारी से उचित है कि स्वयं के पैरो पर खड़े होना। सुलेमानी का यह मानना था कि आत्मनिर्भर बनो और दूसरों को भी सहयोग करके आत्म निर्भर बनाओ। तब विश्व में भुखमरी समाप्त होगी और सम्पन्नता आएगी। चाटुकारी के विरोध के कारण ही सउदी से सुलेमानी की नहीं बनती थी। सउदी शासक सुलेमानी को अपना दुश्मन मानते थे।
सुलेमानी ने ईरान की विदेश नीति के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बड़ा काम किया था। 2003 में सद्दाम हुसैन के शासन के गिर जाने के बाद इराक ने तेहरान पर पुर्नविचार आरम्भ कर दिया था। इराक के अधिकांश राजनीतिक वर्ग अनिवार्य रूप से ईरानी सत्ता के पक्ष में थे। जिसमें पूरी भूमिका का केन्द्र कासिम सुलेमानी ही थे। जिनसे प्रभावित होकर ईराक ने ईरान के बीच मतभेदों को मिटाकर एक साथ आने की दिशा में कार्य आरम्भ कर दिया था।
ईराक में आईएसआईएस के खिलाफ सुलेमानी मुख्य भूमिका में थे जिनके सहयोग से ही ईराक का शिया वर्ग इस्लामिक स्टेट को हटाने में पूर्ण रूप से जुट गया था। अगर आज असद सीरिया में जीत का दावा कर सकते हैं, तो यह मुख्य रूप से सुलेमानी की रणनीति के कारण ही था। आतंकवाद के धुर विरोधी के रूप में जानेजाने वाले सुलेमानी ईरान की ज्यादातर क्षेत्रीय नीतियों को भी तय करते थे लेकिन पिछले कुछ सालों में वह ईरान के सार्वजनिक परिदृश्य से बाहर हो गए थे हालांकि वह अभी भी परोक्ष रूप से काम कर रहे थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कासिम सुलेमानी अक्सर सैनिकों के साथ युद्ध क्षेत्र की तस्वीरों में देखे जाते थे, ईरान और इराक में सैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल होते थे। सुलेमानी एक प्रमुख पद पर विराजमान होने के साथ-साथ एक समान्य व्यक्ति थे जोकि अपनी सेना के जवानों के साथ सदैव प्रत्येक स्थानो पर देखे जाते थे।
एक फौजी अफसर के साथ-साथ सुलेमानी आर्थिक नीति के बहुत बड़े जानकार माने जाते थे। तमाम प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था संघर्ष कर रही है और लोगों की आमदनी पर भी बहुत भारी असर पड़ा है। निर्यात पर प्रतिबंध होने के कारण ईरान आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। जिसमें सुलेमानी की क्षेत्रीय नीति वाली तरकीबें ही ईरान की सभ्यतायी गर्व के तौर पर देखी जाती थीं। जोकि ईरान के इस कठिन दौर में ईरान को आर्थिक तंगी का सामना करने के लिए बल प्रदान करती थीं। सुलेमानी की दूर दृष्टि तथा नीति के कारण ही ईरान तमाम तरीकों के अमेरिकी प्रतिबंधों का सामने करने में टिका हुआ था। यह सुलेमानी की ही देन थी जिन्होंने आर्थिक तंगी एवं अमेरिका की पाबंदी के समय में ईरान को नई नीति के साथ मजबूती के साथ अपने पैर जमाए हुए खड़े रखा। ईरान के विदेश मंत्री जावद जारिफ ने उनकी हत्या को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद जैसा कदम बताया और कहा कि यूएस को अपने दुष्साहस के परिणामों की भी जिम्मेदारी लेनी होगी। सत्य यह है कि सुलेमानी न केवल ईरान के सबसे ताकतवर व्यक्ति थे बल्कि वह अपने उदारवादी एवं सरल स्वाभाव के कारण विश्व स्तर पर एक बड़ा चेहरा थे। जनरल सुलेमानी सादगी के लिए दुनिया में जाने जाते थे। जनरल सुलेमानी का मानना था कि मैं एक गरीब किसान परिवार से आया हूँ। इसलिए मुझे सदैव गरीबों और पीड़ितों की मदद करते रहना चाहिए। और सभी शोषितों के हित के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए। इसी कारण जनरल सुलेमानी पूरे विश्व में बहुत ही तेजी के साथ मजबूत होकर उभरे।
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीति विश्लेषक।
(सज्जाद हैदर)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।