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कभी न कभी तो निकल आयेगा हल।
ये जो आफते आ रही है मुस्लसल।।
न खटखटा कोई दर,न देख कोई राह
उसके दरबार ,बस तू नंगे पाँव चल ।।
बीत गया गर आज अच्छा तेरा वक्त
ठहर न पायेगा ,ये जो बुरा है पल।।
कोशिश तू कर,न बैठ वादो पे किसी के
टूट जाते है वादे,प्रयास होते न विफल।।
दूर करने है अंधेरे,हम को अब खुद ही
हौसला रख और मशाल लेकर निकल।।
#सुरिंदर कौर
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