बेनकाब 

Read Time4Seconds
vijayanand
शोभा यात्रा के मद्देनजर जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक-धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों की एक बैठक बुलाई गयी।
 नगर भवन में डी एम साहब सभी को संबोधित कर रहे थे – ” आप सभी प्रबुद्ध लोग हैं, जिन पर आज बहुत बड़ी जिम्मेदारी है…सामाजिक सौहार्द्र और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की। पिछले वर्ष की अप्रिय स्थितियां अभी भी हमारे जेहन में ताजा हैं। उसकी पुनरावृत्ति न हो, हमें ये सुनिश्चित करना है।हम ऐसा माहौल बनाएँ कि प्रेम, एकता,समरसता, अमन-चैन और भाईचारे की मिसाल बन जाए….हमारा शहर। हम सभी उस एक ही परवरदिगार, ईश्वर की नेक संतान हैं। जरूरी है कि हम एक-दूसरे के सुख-दु:ख बाँटें, मिल-जुलकर अपने पर्व-त्योहार मनाएँ और एक रहें।मैं हाथ जोड़कर आप सबसे विनती करता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि आप सभी प्रशासन को पूरा-पूरा सहयोग देंगे…..। ”  बोलते-बोलते हुए वे भावुक हो गये थे। तालियाँ बजाकर जब सबने सहमति जताई, तो डीएम का भी आत्मविश्वास बढ़ा। पिछले वर्ष की घटनाओं को याद कर उन्होंने एक और अनुरोध करना जरूरी समझा – ” …….साथ ही, आपलोग  ये  भी सुनिश्चित  करेंगे  कि जुलूस में किसी प्रकार के आपत्तिजनक नारे नहीं लगें।वरना……। “
” क्यों नहीं लगेंगे ” पाकिस्तान ज़िंदाबाद ” के नारे…..?  ” – आदर्शनगर के विधायक धर्मपाल नेगी जी अचानक अपना आपा खो बैठे और तैश में  सीट से उठ खड़े हुए।क्षणांश में ही अप्रकट,  प्रकट हो गया। वे अपनी ही घिनौनी  राजनीति के दलदल में समाने लगे थे।
” ये देखो….! हमारा शक सही निकला। ” आक्रोश भरा समवेत स्वर उभरा और सभी अपनी-अपनी कुर्सियों से उठ खड़े हुए। सबकी निगाहें अब नेगी की ओर थीं। पिछले साल दंगे में  हुई तबाही और बर्बादी का खौफनाक और हृदयविदारक मंजर सबकी आँखों के सामने से गुजर गया।
जाति, धर्म, संप्रदाय की राजनीतिक और वैचारिक चिता पर इंसानियत की लाश धू-धू कर जल रही थी और, जलते माँस की चिराईंध गंध हवा में फैल गयी थी।

                       #विजयानंद विजय

परिचय : लेखक विजयानंद विजय बक्सर (बिहार)से बतौर स्वतंत्र लेखक होने के साथ-साथ लेखन में भी सक्रिय है |

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

 *वतन*

Fri Jun 29 , 2018
वतन, बस  भू मण्डल  के कुछ, एक हिस्से  का  ही नाम नहीं है। वतन,  सीमा रेखा में शासन का, और  सरकारों का काम नहीं है। वतन, इंसानों की आबाद बस्तियों, का रहने बसने का ही धाम नहीं है। वतन, प्रभुसत्ता धारी संविधान का, केवल कोरा शुभ गुण गान नहीं है। […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।