Author Archives: matruadmin - Page 1012

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आतंकी उन्माद

आतंकी उन्माद को, जो करता भयभीत। राघव के उस चाप को, है प्रणिपात विनीत।। निशाचरी आतंक ने, बोया भय,संत्रास। राम-चाप ने अभय का, मन्त्र,आत्मविश्वास।।            …
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देखा है मैंने

देखा है मैंने, भावना सत्य और न्याय को... अर्थ की तराजू मेंं तुलते पवित्र नैतिकता के सूर्य पर, सैकड़ों  प्रवंचनाओं के बादल- घिरते। मरीचिकाओं के रिश्वत केे बल झूठ को…
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कुछ ढूँढती है

इस मेले में मेरी नज़र कुछ ढूँढती है, बहुत कुछ है यहां,फ़िर भी कुछ ढूँढती है। सागर है गहरा,रत्न भी निकले  हैं कई ठंडक भी बहुत है,मगर मीठापन कुछ ढूँढती…
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शपथ लो..

(विश्व पर्यावरण दिवस विशेष) मुठ्ठी बांध सभी आते हैं, हाथ पसारे जाओगे। लेकिन एक पेड़ की लकड़ी साथ-साथ ले जाओगे। निज जीवन में एक वृक्ष के संरक्षण की शपथ लो,…
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बचाएं पर्यावरण

(विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष) चलो बचाएं पर्यावरण, आओं करें पौधारोपण। बढ़ रही है ओजोेन गैस, इसलिए करें पौधारोपण॥ चलो बचाएं  पर्यावरण, फैला  चहुंओर  प्रदूषण। फैल  रही  हैं बीमारियां, भू…
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चलि दिए विराट विश्व

चलि दिए विराट विश्व,लै कें फुरकैंया; ध्यान रह्यौ निज सृष्टा, नैनन लखि पैयाँ। पैंजनियाँ बजति रहीं, देखत है मात रही; प्रकृति ललचात रही, झाँकन रुचि आत रही। सँभलावत गात चलत,…
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