पुलवामा हमला: बलिदान का बदला कब?

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hemendra
वीभत्स् आतंकी करतूतों से देश एक बार और दहल गया जब पाकिस्तान कहें या आतिंकस्तान की कोख व पनाहगाह में पैदा हुई नापक औलादों ने 14 फरवरी को जम्मू-श्रीनगार हाईवे पर पुलवामा के अवंतिपुरा में केन्द्रीय रिर्जव पुलिस बल के काफिले पर फिदायीन हमला कर दिया। बरबस 44 सैनिक शहीद हो गए, बाकि अस्पताल में जिंदगी व मौत की जंग लड़ रहे है। जालिमों ने 200 किलो विस्फोटक से लदी एसयूवी कार को सैनिकों से भरी सीआरपीएफ की बस से भिड़ा दी। बेगर्द आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस कायराना हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कश्मीर के गुंडीबा-पुलवामा के आतंकी आदिल अहमद ने अंजाम देना बताया।
अध-बीच सोचनिए बात! सुरक्षा से चाकचौबंध अतिसंवेदनशील घाटी में कारिंदों के पास इतना सारा विस्फोटक और वाहन कहां से आ गया। पाकिस्तान से उड़कर तो नहीं आया होगा, दिया या मदद किया होगा तो किसी भी देशद्रोही या मौजूदा नापाक, पाक परस्त ने। अन्यथा खाते इधर का और गाते उधर का है बदनियती वाले जयचंदों के बिन मजाल है कोई चिडिय़ा भी पर माले। ये तो चंद मुटठी भर ना मुराद जाहिल है उनकी उतनी हिमांकत किया जो हिन्दुस्तान की सरजमीं पर दहशतगर्दी फैला दे।
लिहाजा, मूल्क और वादी की फिजा में खलल डालने इस हमले के लिहाज से हर वो एहसान फरामोश हुकमरान जिम्मेदार है जो मतों का रहनुमा आतंकवादियों को मानता है। सर्जिकल स्ट्राइक और शहादत के सबूत मांगता है। हर वो खबरची जिम्मेदार है जो कहता है आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता। हर वो जमात जिम्मेदार है जो दशहतगर्दो के वास्ते झंडे लेकर सड़क पर उतरने आतुर रहता है। अलावे हर वो नीच, गद्दार वकील जिम्मेदार है जो हत्यारों को फांसी के फंदे से महरूम करवाने आधी रात को अदालत में जद्दोजहद करते फिरता है। पाकिस्तान और आंतकवादी सरगनाओं का अमला तो  केवल एक एक सुरतेनामा है। असल, गद्दार इधर ही अपने घर में जो आस्तिन के सांप बनकर छुपे हुए हैं। अब उनको नेस्तनाबूत करना इंसानियत, वतन और जहान की मुहफजनियत निहायत जरूरी है।
गौरतलब समय हिलाहवाली का नही है हमले से जमूरियत का खून खौल रहा है। सब्र का प्याला टूट चूका है। बलिदान का बदला कब? जितना बड़ा हमला, उतना बड़ा बदला लेने का समय आ गया है। प्रहार कर बहुत कठोर कदम उठाना होगा क्योंकि ऐसे हमले को ही नहीं भूलाया नहीं जा सकता। आखिरकार आतंकवाद मानवता के विरूद्ध है इसे हर हाल में परास्त कर खत्म करना होगा। शहीदों के एक-एक लहू का कतरा व्यर्थ नहीं जाना चाहिए येही सवा सौ करोड़ देशवासियों का प्रण और आतंक के खिलाफ आखरी रण है।
बतौर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तल्ख लहजे में कहा कि पाकिस्तान के आतंकी मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे। दुनिया ने हमले की निंदा की है, पाकिस्तान तबाही के रास्ते पर चल रहा है । भारत को तबाह करने की उसकी मंशा हरगिज पूरी नहीं होगी। हम हिन्दुस्तानी ऐसे हमले को मुंहतोड़ जवाब देंगे, सभी देश आतंकवाद के खिलाफ हमारे साथ खड़े है। आंतक को रोकने हमारी लड़ाई और तेज होगी। आतंकियों ने बहुत बड़ी गलती की है उन्हें इसकी बड़ी सजा चुकानी होगी।130 करोड़ लोगों का गुस्सा जाया नहीं जाएंगा क्योंकि ये वार जवानों पर नहीं बल्कि1 वतन है इसलिए सुरक्षा बलों को पूरी स्वतंत्रता दी गई है। मामले में पक्ष-विपक्ष राजनीति की छींटाकशी से दूर रहे, तभी हम आंतक का सफाया कर पाएंगे। बातों में दम है, देखते है कथनी, करनी में कब तब्दील होती है। शब्दाजंलि! जवानों ने देश की सुरक्षा, समृद्धि के लिए जो बलिदान दिया है उसका बदला इस अटल वादे और इरादे से पूरे होंगे। तभी नहीं चाहिए निंदा, एक भी आतंकवादी ना बचे जिंदा अमलीजामा पहनेंगा।
#हेमेन्द्र क्षीरसागर
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।