रहें सलामत सबके भैया,सबको दुआ हजार। सजे कलाई हाथ सभी के राखी के त्यौहार॥ अमर भाई-बहना का प्यार…। धूप दीप रोली चंदन की थाली लिए खड़ी बहना। बाँधेगी निज प्यार कलाई छोटी और बड़ी बहना॥ एक अनोखे बँधन का है, यह पावन त्यौहार… अमर भाई-बहना का प्यार…॥ रेशे-रेशे में धागे […]

अंतस में होगा नहीं,जब तक ज्ञानालोक। बने रहेगें रात-दिन,जीवन में दुःख शोक॥ जितनी माला फेरिए, करिए मंत्रोच्चार। मन की पावनता बिना,यत्न सभी बेकार॥ अधरों पर हरि नाम है,मन में कटुता भाव। पार तरे कैसे कहो,भव सागर से नाव॥ धर्म पंथ की आड़ में,चलती मुहिम विशेष। धर्म नाम पर हो रहा,धर्म […]

तूफ़ानों में थामते,जो सत की पतवार। होती है भव से सदा,उनकी नैया पार॥ विपदा काले धारते,जो अंतस में धीर। विजय वरण करते सदा,केवल वही सुधीर॥ तूफ़ानों से जो लड़े,हुए अंततः पार। कोशिश की होती नहीं,कभी किसी युग हार॥ तम की छाती चीरकर,निकली किरण सुदीप। जब मन में रोशन हुआ,आशाओं का […]

आँगन-आँगन उग रहे,भौतिकता के झाड़। संस्कारों की तुलसियाँ,फेंकी गई उख़ाड़॥ मन में जब पलने लगें,ईर्ष्या द्वेष विकार। तब निश्चित ही जानिए,नैतिकता की हार॥ जिनका जीवन मंत्र है,कर्म और पुरुषार्थ। वे जन ही समझे सदा,धर्मों का भावार्थ॥ जिनके मन पैदा हुआ,वैचारिक भटकाव। डूबी है उनकी सदा,भवसागर में नाव॥ कर्म भूल जब-जब […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।