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राधा कृष्ण के बिन हमेशा आधी ही रही, पूर्णता के लिए वैवाहिक बंध चाहिए, जो उसे न मिल सका पर क्यों ? क्या द्वापर युग में राजा महराजा और उनकी प्रजा एक पत्नीधारी थे ? कोई उपपत्नियाँ नहीं रखते थे, क्या सवाल का कोई जबाब है ? प्रेयसी केवल प्रेम […]

हे पार्थ! मेरा अनुनय स्वीकार करो, मेरा थोड़ा भार तुम ले लो। जैसे मैंने तुम्हारा लिया है, माहवारी की पीड़ा नौ महीने की कोख, प्रसव की असहनीय पीड़ा शिशु को स्तनपान कराना, उनका लालन-पालन घर के कामकाज का भार, मेरे ही कंधों पर है… अब तो मैं बाहरी काज भी, […]

हिना ही तो हूँ मैं, हिना हाथों पे अपना रंग छोड़ती है, मैं लोगों के चेहरे पे मुस्कान। वो भी खुद सिलबट्टे पे घिस-घिसकर पिस जाती, और मैं भी तुम्हारे इंतजार में रोज-रोज मिटकर, प्यार तो हम दोनों ही करते बस फ़र्क इतना है, कोई घिसकर तो रोज जीकर मरता। […]

उससे मोहब्ब़त की चाहत में जब भी दिल लगाया, कविता को लिखा जब भी दिल टूटा कविता  को लिखा। कुछ पन्ने खो गए, कुछ पन्ने रद्दी की टोकरी में चले गए कुछ को मैंने जला दिया, कुछ खुद-ब-खुद गायब़ हो गए। बार-बार कलम पकड़ी, बार-बार कलम छोड़ी इसे पकड़ने और […]

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आदमी मुखौटा है, या मुखौटे में आदमी ये पहेली अनसुलझी है। कौन असली होकर, भी नकली-सा है और कौन नकली होकर असली-सा है। कलयुग में ये फेर समझना मुश्किल है। कौन सच्चा, कौन झूठ है तराजू से तौलना कठिन है, क्योंकि झूठ सौ बार कहकर सच बन जाता, सच चिल्ला-चिल्लाकर […]

चूल्हा भी धू-धू करे, जलने के लिए। दिल भी शुकुर-शुकुर करे, धड़कने के लिए॥ पक्षी भी फुर्र-फुर्र करे, उड़ने के लिए। साँसें भी हुकुर-हुकुर करें, चलने के लिए॥ मेरा मन भी फुसुर-फुसुर करे, तुझे प्यार करने के लिए। आ गुटर-गूँ करें, दोनों मिलने के लिए॥           […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।