मँहगी सब्जी मँहगी दाल मँहगा हुआ अचार है कोरोना के सँग सँग देखो मँहगाई की मार है। मची है देखो मारामारी गजब बड़ा ये ढा रही चरम पे कालाबाजारी जन जन को है रुला रही जीवन वायु को न छोड़ा कितना भ्रष्टाचार है कोरोना के संग,,, हर वो चीज हुई […]

मानव मानव सब एक समान न कोई छोटा न कोई बडा क्यों मैं ऊँचा क्यों वह नीचा क्यों मैं खास क्यों वह आम हम सब है प्रभु की सन्तान तब क्यों करते हम अभिमान विद्वान् हो तो झुकना सीखो धनवान हो तो नम्रता सीखो क्रोध का कर दो अवसान ईर्ष्या-द्वेष […]

ज़रा शर्म करो ओ हैवानों, ना इतने बड़े तुम पाप करो। दौलत के मद में अंधे होकर, ना मानवता का विनाश करो। आफत के इस अवसर में, स्वार्थ ना अपना सिद्ध करो। होकर लालच के वशीभूत, तुम ना खंजर से वार करो। मोल भाव कर डाला तूने, ना जाने कितनी […]

ये कैसे जमाना आया है,ये दुनिया कहां जा रही है। जैसे किए हैं कर्म इसने,वैसे ही ये फल पा रही हैं।। पेड़ काट काट कर दुनिया,प्रकृति का दोहन कर रही है। आज मुर्दे को जलाने के लिए लकड़ी भी न मिल रही हैं। ये कैसे संस्कार है दुनिया के अपनी […]

इंसान की गलतियों का फल भोग रहे हम। यही दुर्भाग्य हमारा यही दुर्भाग्य हमारा।। विश्वगुरु बनने के चक्कर में दो देश में छिड़ गई जंग। बाकी पीछे पीछे हो लिए देकर अपना समर्थन। सबके लिए मिला है अब ये प्रसाद बराबर।। यही दुर्भाग्य हमारा यही दुर्भाग्य हमारा। इंसान की गलतियों […]

ज़माने की हवा बदल रही हर दिन, कहाँ चले गये अब वो बहार के दिन, ख़त्म हो चला इंसानियत का दौर , हर तरफ़ आँसू दर्द शोर ईद के दिन । चाँद , सूरज, हवा सब ग़मगीन है, कौन खुश है इस बार ईद के दिन । हर तरफ़ है […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।