(अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष) भारत की शान है योग, गीता,वेद,पुराण है योग। सबका कल्याण है योग, भारत की जान है  योग॥ संस्कृति की आन है योग, प्रकृति का वरदान है योग। शरीर  की  स्फूर्ति है  योग, वीरों-सी शक्ति  है  योग॥ स्वस्थता का राज है योग, मन की एकाग्रता है योग। […]

2

बरसो बदरा अब तो बरसो मेरे मन के आँगन में, उमड़-घुमड़ कर आ जाना इस बार हमारे सावन में।   गर्म हवाएं छू-छूकर,अब तो उपहास उड़ाती हैं, मार थपेड़े धूल कणों से,मन का दर्द बढ़ाती है.. रिमझिम-रिमझिम गीत सुनाओ,बियाबान इस उपवन में, इन्द्रधनुष के रंग सजाना,आप हमारे सावन मेंll।।   […]

प्यारे पापा,न्यारे पापा, तुम शिक्षक अनमोल हमारे। नन्हें-नन्हें कदमों को तुम चलना सिखलाते हो, सूनी-सूनी आँखों में तुम नए ख्वाब जगाते हो, प्यारे पापा,न्यारे पापा, तुम शिक्षक अनमोल हमारे॥ गिरकर उठना,उठकर चलना.. तुम सिखलाते हो, खेल-खेल में पापा मेरे , कैसे पाठ पढ़ाते हो? प्यारे पापा,न्यारे पापा, तुम शिक्षक अनमोल […]

  हल चलाता जा हे हलधर! इस तपती रेती में, जोते जा तू उम्मीदों को अपनी,गिरवी खेती में। न आया बादल आषढ़िया,गहराया न सावन… श्रम बिन्दु झरझर बरसा,तू बंजर रेती में।।   पूछत प्रिया तेरी तुझसे कैसी होगी अबकी खेती? ब्याह देगें क्या अबके मुहूर्त में अपनी बड़की बेटी! बहुत […]

  अपना देश भी कितना अजीब है, हर कोई इन्सानियत का रकीब है। बेटे और बेटियों की बोली लगती है, कलम चलाने वालों पर गोली चलती है। कभी कोई पत्रकार बेचारा जाता है, कभी कोई साहित्यकार मारा जाता है। दर्जनों के हत्यारे को जमानत मिलती है, सत्य-वक्ता को यहाँ जेल […]

चलो मनाएं पितृ दिवस आज, आपने हमें बचपन से सिखाया आपने हमें खुश रखना ठाना, दुनिया की राह में चलना सिखाया। बूढ़े-बच्चों से व्यवहार करना सिखाया, आपके बिना रहा नहीं जाता.. दूर छोड़कर जाया नहीं जाता, पिता, पिता होता है, बेटा छोटा हो या बड़ा, हमेशा उसके साथ होता है। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।