एक हसीन शाम बनके आई है मेरे लबों पे जाम बनके आई है देखा है उसने बड़ी नजाकत से लगता है कोई पैगाम बनके आई है कातिलाना लगती है उसकी अदाएं मेरी चाहत गुलफाम बनके आई है इश्क मुझको ही मुक्कमल है जैसे इबादत  मेरी पहचान बनके आई है भा […]

दिल किसी का दुखाना नहीं हमको चेहरा किसी से छुपाना नहीं हमको तिरंगा लहराते हम शान से चलते है कभी सर भी झुकाना नहीं हमको दूरी बनाकर हम रखते है उनसे भी ग़द्दारों को पास बिठाना नहीं हमको दिखाए आँख जो हमको चिर देंगे हम गलती से भी आजमाना नहीं […]

जमाने मे कौन समझदार है जिसको भी  देखो  गद्दार है सरेआम घूमता गुंडा भी देखो हथकड़ी में जकड़ा कहां गिरफ्तार है पसीना भी ऐसे निकलने लगा है वक्त की तेज सबसे  रफ्तार  है लड़ाई ये झगड़े हड़तालों का खेल उदासीन बहुत ही  ये सरकार है अमन चैन खोया ना शान्ति […]

कदम मैंने रखें जबसे जमीन पर स्वर्ग सा ही तो लगता जमीन पर धरती माँ की गोद मे बड़ा सुकून है राहत मिलती मुझे बस जमीन पर आसमानों को छूने की ख्वाहिश नहीं मेरा घर ही मिला मुझे जमीन पर खुशियां रंगीनियां महक ये चहक खूबसूरत नजारे सब है जमीन […]

कोई किसी के निशाने पर है ऐतबार नहीं जमाने पर है किसी को पढ़ पाना आसां नहीं दर्द किसी का मुस्कुराने पर है मूर्खो से बहस करें तो कैसे करें भला तो फिर सर झुकाने पर है मासूम फूल भी खिलकर बिखर गया तोड़ा किसी ने फिर मुरझाने पर है […]

मेरे दिल की हर बात समझती हो मेरे खयालात समझती हो तुमसे रिश्ता कोई गहरा है तभी मेरे जज्बात समझती हो रहूं खामोश तो मायूस तुम भी तो तुम मेरे हालात समझती हो आती नहीं नींद करवट बदलता हूँ कैसे कटती मेरी रात समझती हो आँखों में समाई है तस्वीर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।