तुझे भूल जाना चाहती हूँ

jiya

स्याह रातों में अब सोना चाहती हूँ,                                                                                                                                                                                                                                                  मैं तुझे अब भूल जाना चाहती हूँl

तेरे गम की सौगात जो मिली मुझे,
आँखों से परदे हटाना चाहती हूँl

तेरे झूठे वादों की झूठी कसमें,
खुदा कसम मैं मर जाना चाहती हूँl

तेरे इश्क़ का वो अन्दाजे बयाँ,
उफ्फ,चाँद तुझ पर वारना चाहती हूँl

सीखा कहाँ से तुमने काला जादू,
तुझी पर मैं आजमाना चाहती हूँl

#ज़िया हिन्दवाल ‘गीत’
परिचय :श्रीमती ज़िया गीता हिन्दवाल का वर्तमान निवास देहरादून (उत्तराखंड) स्थित आदर्श नगर में है। आपकी शिक्षा- 
एम.ए.( हिंदी)है। साहित्य सम्मान में आपको तुकान्त प्रतियोगिता में दो बार प्रथम स्थान,हाइकु प्रतियोगिता में तृतीय स्थान,तथा अन्य साहित्य सम्मान प्राप्त हैं। लेखन विधा में आप तुकान्त,हाइकु, नज़्म,रुबाई,मुक्तक,लघुकथा,शेर और चुटकुला आदि लिखती हैं। लिखने का उद्देश्य-लिखना अच्छा लगता है,इसलिए लिखती हैं और शायद मन को खुश रखने का ये भी एक तरीका है। 

matruadmin

Next Post

अधिकार व कर्तव्य

Tue Feb 6 , 2018
तुम हमारे अधिकार से जीते हो, और हम तुम्हारे कर्तव्य बोध पर अधिकार तो हर पाँच वर्ष बाद आता है, पर कर्तव्य बोध का परिणाम  पाँच वर्ष पर्यंत झेलना होता हैl  अधिकार और कर्तव्य होते तो हैं परस्पर आश्रित, लेकिन इनका परस्पर संघर्ष भी विकट, होता है। न्याय और सुरक्षा व्यवस्था […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।