खल रही जिंदगी 

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naveen akela
छल रही है जिंदगी,
चल रही है जिंदगी।
है कभी मिठास तो,
है कभी खटास भी।
महफिलें सजी हुई,
है कभी वनवास भी॥
ढल रही है जिंदगी,
चल रही है जिंदगी।
उम्मीदों के तूफान है,
डूब का अनुमान है।
हौंसलों की नाव पर,
किनारों का अरमान है॥
संभल रही है जिंदगी,
चल रही है जिंदगी।
तम घनेरा हो रहा,
नफरतों को बो रहा।
राजा जी है नींद में
लोकतंत्र रो रहा॥
खल रही है जिंदगी,
चल रही है जिंदगी।
#नवीन जैन ‘अकेला’
परिचय : नवीन कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम-अकेला है। जन्मतिथि-१९ अप्रैल १९६९ एवं जन्म स्थान-भोपाल है। आप वर्तमान में मध्यप्रदेश के मंडला जिले में ग्राम पंचायत-देवदरा में बसे हुए हैं।शिक्षा-उच्चतर विद्यालय और आयुर्वेद रत्न(वैद्य विशारद)है। पेशे से व्यवसाई श्री जैन सामाजिक क्षेत्र में विभिन्न संस्थाओं के कार्यक्रमों में भागीदारी रखते हैं। आपकी विधा-गीत,ग़ज़ल,दोहा,  लघुकथा और हाईकु है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाओं का  प्रकाशन होता रहा है। नेहरु युवा केन्द्र द्वारा ‘श्रेष्ठ युवा’ सम्मान एंव विभिन्न साहित्य संस्थाओं द्वारा भी आप सम्मानित किए गए हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-आत्मसंतोष एंव जागरुकता
फैलाना है। 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।