ब्रह्मनंदिनी हिंदी

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rajnish dube
है अविरल-सी तू कोमल बोली,
गठित पाट की जैसे सुंदर डोली।
सरल सौम्य की सुता वास्तविक,
नित्य जीविका गद् पद्य सात्विक।
है यथार्थ का विश्वास मनोरथ,
कई मंतव्यों से गंतव्यों तक।
जैसे गमन विहार में युक्ति सूचक,
वैसे युद्ध प्रहार से मुक्ति बोधक।
कष्ट निवारक दिव्य परिणामक,
है विश्लेषक विभक्त विचारक।
इस प्रेमा-अंतर से कालान्तर तक,
नगर मार्ग से कहीं घटनास्थल तक।
कोऊ दोषी न निर्दोषी ख्याति में,
न ही आती है ये किन्हीं जाति में।
ये मानक प्रियता में-अप्रियता में,
किसी जिज्ञासक की अज्ञानता में।
बलशाली होकर बलिदानों में,
भारत के भक्ति-मय गानों में।
अनाज के उपजे हर दानों में,
वादन सुनते इन सब कानों में।
पूरक से पूरित है माँ हिन्दी,
अंधकार का प्रकाश हिन्दी।
भारत माँ के माथे की बिन्दी,
है मातृभूमि की सुंदरता हिन्दी।
वाद-विवाद का प्रसाद तुम हो,
नृत्य ताल की स्वरा भी तुम हो।
उत्तिष्ठ भारती सभ्यता कुमारी,
दिव्य मधुरता से वाणी पारखी।
स्वच्छ आवरण का वरण है हिंदी,
प्रखर ब्रह्म ज्ञान की शरण है हिंदी।
हित-परहित की चक्षुका है हिन्दी,
सबके भविष्य की शिक्षिका हिंदी॥
                                                      #रजनीश दुबे’धरतीपुत्र'
परिचय : रजनीश दुबे’धरतीपुत्र' की जन्म तिथि १९ नवम्बर १९९० हैl आपका नौकरी का कार्यस्थल बुधनी स्थित श्री औरोबिन्दो पब्लिक स्कूल इकाई वर्धमान टैक्सटाइल हैl  ज्वलंत मुद्दों पर काव्य एवं कथा लेखन में आप कि रुचि है,इसलिए स्वभाव क्रांतिकारी हैl मध्यप्रदेश के  के नर्मदापुरम् संभाग के  होशंगाबाद जिले के सरस्वती नगर रसूलिया में रहने वाले श्री दुबे का  यही उद्देश्य है कि,जब तक जीवन है,तब तक अखंड भारत देश की स्थापना हेतु सक्रिय रहकर लोगों का योगदान और बढ़ाया जाए l  
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।