सबक सिखाने की छूट मिले सेना को

anupam tivari
भारत सरकार द्वारा सेना को कश्मीर में आतंकियों की ढाल बनने वाले पत्थरबाजों को सबक सिखाने की खुली छूट दी जानी चाहिए,जिससे उन पत्थरबाजों को आतंकवादियों का साथ देने का परिणाम पता चले। उनसे निपटने के लिए पैलेट गन की जगह एसएलआर और ए.के.- 47 जैसे हथियारों के इस्तेमाल करने का निर्देश भी दिया जाना चाहिए,जिससे किसी भी आतंकवादी या जिहादी को कट्टरपंथ या आतंकवाद जैसे घिनोने विचारधारा का विस्तार करने का मौका न मिल सके। हमारे देश की सीमा की सुरक्षा करने वाले सेना के जवानों के ऊपर पत्थर बरसाने वाले पत्थरबाजों के समर्थन में तमाम कथित बुद्धिजीवीयों द्वारा मानवाधिकार का हनन बताया जाता है,जो हमारी सुरक्षा करने के लिए अपने सारे सुख-चैन को त्याग कर अपने परिवार से दूर जाकर सीमा की रक्षा करते हैं। सीमा की रक्षा करते- करते उनमें से कई शहीद भी हो जाते हैं। वे लोग यह सब इसलिए करते हैं,ताकि हम लोग चैन की नींद सो सकें,अपनी और परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें।
यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि, इतना त्याग और बलिदान करने के बाद भी अगर इन्हें कातिल,बलात्कारी और मानवाधिकार का हनन करने वाला बताया जाता है तो इस देश के भविष्य के बारे में ईश्वर भी कुछ नहीं कर सकते हैं। ऐसा देश जहां, आतंकवादियों और आतताईयों को प्रश्रय मिलता है,वह देश विकास की ऊंचाइयों को कैसे छुएगा।
माफ कीजिएगा, छोटा मुंह बड़ी बात कर रहा हूं,लेकिन जब वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति करने के चक्कर में ऐसे राष्ट्रद्रोहियों को नायक बनाया जाएगा,जो अपने नेतृत्व में नारे लगवाते हैं ‘अफजल हम शर्मिंदा हैं तुम्हारे कातिल जिंदा हैं, कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा’,तो ऐसे देश में गृह युद्ध के अलावा और किस चीज की अपेक्षा की जा सकती है। जहां आप आतंकियों को इस इस लालच में निर्दोष बताते हैं कि वे जिस जाति, धर्म से हैं उन जाति धर्मों के लोग आपको उनका समर्थन करने के लिए आभार मानते हुए वोट करेंगे तो या तो आप बड़े मूर्ख हो या फिर जनता को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हो। क्योंकि,भारत देश के निवासी चाहे वे किसी भी जाति,धर्म या संप्रदाय के हों वे पहले भारतीय हैं,उसके बाद हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई या किसी जाति -संप्रदाय के हैं। आतंकवादियों और आतताईयों का कोई धर्म नहीं होता, यह सबको पता है। इनका समर्थन करके आपको किसी प्रकार का कोई राजनीतिक लाभ मिलने से रहा। अगर राजनेता किसी आतंकवादी को संरक्षण देते हुए किसी धर्म को साधने की कोशिश करते हैं, तो उस धर्म का अपमान ही करते हैं। इसे सभी लोग समझ चुके हैं। ये मुट्ठी भर नेता सवा सौ करोड़ की जनसंख्या में फूट डालकर अपनी रोटी सेंकने की फिराक में हैं। ऐसे में हर भारतीय से मेरा निवेदन है कि,किसी भी नेता के बयान को सुनने के बाद विचार करें, तत्पश्चात ही उनके बारे में कोई राय बनाएं।

                                                                           #अनुपम तिवारी ‘मन्टू’ 
परिचय:सामाजिक कार्यकर्ता वाली पहचान  अनुपम तिवारी ‘मन्टू’ ने बनाई हैl इनकी शिक्षा बी.कॉम. हैl उत्तरप्रदेश के देवरिया जिला के भठवां तिवारी गांव के निवासी हैंl यह शौकिया लेखन करते हुए जब भी समय मिलता है तो कुछ प्रेरक और निष्पक्ष लिखने की कोशिश करते हैं ताकि,युवा साथियों को सही-गलत का निर्णय करने में सहयोग मिल सकेl 

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।