चल अब सुबह होने दे

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saini

रात बहुत हो गई,
चल अब सुबह होने दे…
चलना कहाँ है अभी,
सोच तो लेने दे।

चल देंगे सुबह जल्दी,
जहाँ मंजिल बुला रही होगी,
होगी कोई आवाज़ ऐसी, जो हमें अपनी ओर बुला रही होगी….।

जरूरी तो नहीं ,जहाँ बादल छाए रहें, वहाँ हर बार बारिश ही होगी…..
इंसान हिन्दू हो या मुस्लिम,
आत्मा तो एक जैसी ही होगी….।

सुना है दुनिया में तन्हाई की,
कोई कीमत नहीं होती..
क्यों न खोए रहें हम ,
अपनी ही दुनिया में ,
जहाँ हमें किसी और की
जरूरत भी नहीं होगी…।

#मनीष सैनी

परिचय : राजस्थान के छोटे से गाँव सिकंदरा निवासी मनीष सैनी बचपन से ही कविता लिखने का शौक है,जो आज तक कायम है। ये अभी भी छात्र के तौर पर दिल्ली में रहकर आईएएस की तैयारी कर रहे हैं। इनकी पसंदीदा
चार पंक्ति ये हमेशा ही गुनगुनाते हैं
‘मैं हर रोज हर दिन एक नया सपना देखता हूँ,क्योंकि उन्ही सपनों में से एक सपना मेरे लिये ऐसा होगा,
जो मेरी ज़िन्दगी का आने वाला कल होगा…।’ इनकी रचनाओं में सकारात्मकता के भाव अधिक हैं।

matruadmin

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।