गरीबी

rahulshuklsahil
तड़प रहा हूँ भूख से मैं,
खाना-पीना मिला नहीं,
क्या करता मैं काम भाइयों,
दर-दर ठोकर खाई हैl
नेता कहते थे तुम्हारी
नौकरी है पक्की,
इतनी मेहनत का जो था
उसको भी मैंने गँवायाl
जो बचा था जीने को
उससे शिक्षा का कर्ज पटाया,
आ गया हूँ सड़क पर
अब छत भी है नहीं,
रोटी कमाने जाता हूँ तो
मिलती है गाली मुझे,
तू किसी काम का नहींl
कहते हैं सब मुझे
टूट चुका हूँ मैं अब तो,
मुझसे कुछ होता नहींl
भटक रहा हूँ राह पर
खाना-पीना मिला नहीं,
ये गरीबी किसे बताऊँ
कोई मेरी सुनता नहीं,
घर में जाओ तो नकारा
कह रहे हैं लोग मुझको,
कहाँ मिलेगी मुझको रोटी
बस यही मैं सोचता हूँ,
कैसे हटे मेरी गरीबी
युक्ति वो मिलती है नहींl
राह मिल जाए ऐसी कि,
अपनों को खुश रख सकूँll

                                                                          #डाॅ. राहुल शुक्ल ‘साहिल'
 
परिचय : डॉ.राहुल शुक्ल साहित्यिक जगत में `साहिल` के रुप में जाने जाते हैंl आप कला में स्नातक(इलाहाबाद)हैं, तथा २००८ में बीएचएमएस (ग्वालियर,मप्र)किया है l साहित्य क्षेत्र में उपलब्धि की बात करें तो स्थानीय पत्रपत्रिकाओं में आपकी कविताएं प्रकाशित होती हैंl शिक्षित परिवार के डॉ.शुक्ल के जीवन का उद्देश्य-रुचि यही है कि,पिछड़े क्षेत्र एवं ग्रामीणशहरी लोगों की चिकित्सकीय सेवा करेंl आप वैज्ञानिक अध्यात्मवाद में रुचि रखने के साथ ही हिन्दी साहित्य का अध्ययन व सकारात्मक लेखन करते हैंl कृतित्व में साझा काव्य संकलन है तो छन्दमुक्त कविता,छन्द,गीत,घनाक्षरी छन्द,गद्य लेख और लघुकथा,सूक्तियाँ आदि आप लिखते हैंl करीब २ साल से साहित्यिक लेखन में लगे हुए हैं और उप्र के तेलियलगंज(इलाहाबाद) में आपका रहना हैl

matruadmin

Next Post

न्याय की गुहार

Fri Aug 25 , 2017
सुबह-सुबह जब मैं कार्यालय के लिए तैयार हो रही थी,तभी फोन की घंटी बजीl मैंने फोन उठाया,दूसरी तरफ से आवाज आई `मैडम चौकीदार ने आज फिर बच्ची के साथ अभद्र व्यवहार किया है`, मैडम ऐसा तीसरी बार हुआ है। हर बार मुझे ही छोड़ो जाने दो कहकर शांत कर दिया […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।