न्याय की गुहार

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sudha kanouje

सुबह-सुबह जब मैं कार्यालय के लिए तैयार हो रही थी,तभी फोन की घंटी बजीl मैंने फोन उठाया,दूसरी तरफ से आवाज आई `मैडम चौकीदार ने आज फिर बच्ची के साथ अभद्र व्यवहार किया है`, मैडम ऐसा तीसरी बार हुआ है। हर बार मुझे ही छोड़ो जाने दो कहकर शांत कर दिया जाता है।
बच्चियों द्वारा जब भी कोई शिकायत की गई,मेरे द्वारा सभी जिम्मेदार लोगों को अवगत कराया गया,किंतु आज तक किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं आया। बस बदलती है तो सिर्फ बच्चियां।`
मैडम अजीब बात है,उन बच्चियों के माता-पिता को भी डरा-धमकाकर या तो शांत कर दिया जाता है,या मुझ पर ही कोई उल्टा आरोप लगाकर मुझे ही मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। ऐसा क्यों होता है मैडम?`
`ऊपर से लेकर नीचे तक के सारे जिम्मेदार लोग सिर्फ मामले को रफा-दफा करने में लग जाते हैं। आखिर आप ही बताइए-मैं कहाँ जाऊं,किससे शिकायत करूँ, कौन है ऐसा जो मुझे और मेरी बच्चियों को न्याय दिला सके।`
इससे पहले कि मैं कुछ कह पाती,बोलते-बोलते उसका गला भर आया और फोन कट गया।
मेरे जहन में एक सवाल तीर की तरह आज भी चुभ रहा है कि `आखिर कौन है ऐसा जो मुझे और मेरी बच्चियों को न्याय दिला सके।`

                                                                                   #सुधा कनौजे 
परिचय : श्रीमती सुधा कनौजे मध्यप्रदेश के दमोह में न्यू हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी (विवेकानंद नगर) में रहती हैंl श्रीमती कनौजे दमोह के  जिला शिक्षा केन्द्र में एपीसी(जेण्डर) हैंl 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।