विनाश

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जनसंख्या विस्फोट से,
होगा जग का विनाश।
जन जन को बड़ा तड़पाएगी,
देखो भूख और प्यास।

रहने को जगह ना होगी,
ना छत होगी सिर पर कोई।
ना तेरा कोई जोर चलेगा,
ना चलेगी तेरी हट कोई।

खाने को भोजन ना होगा,
ना पीने को होगा पानी।
याद तुझे फिर आएगी,
तुझको तेरी नानी।

रोजगार ना होगा कोई,
ना होगी कोई कमाई।
खर्चे ना तेरे पूरे होंगे,
मदद ना होगी पराई।

भुखमरी और लाचारी से,
होगा बुरा हाल।
सबको अपनी अपनी पड़ेगी,
ना पूछेगा कोई हाल।

सोचो जरा आज बैठकर,
रोको ये विस्फ़ोट।
ना करो बहाना कोई अब,
लेकर मजबूरी की ओट।

कल को यदि बचाना है,
तो सँवारो अपना आज।
भूल सुधारो आज अभी,
बना लो बिगड़े काज।

छोटे परिवार में खेलें सदा,
खुशियां बेशुमार।
शिक्षा,स्वास्थ्य और धन की,
होती है भरमार।
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स्वरचित
सपना (स० अ०)
जनपद – औरैया

matruadmin

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जनसंख्या नियंत्रण

Mon Jul 12 , 2021
सुनो सुनती हूँ देश की कहानी। जिस में सबसे बड़ी समस्या है जनसंख्या बृध्दी। जिसके कारण देश की व्यवस्था लड़ खड़ा जाती है। बचानी है अर्थ व्यवस्था तो जनसंख्या पर नियंत्रण करना पड़ेगा।। करो पालन परिवार नियोजन के तरीको का। और पहला बच्चा लोगो जल्दी नहीं। और दूसरे में अंतर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।