माखनचोर लीला रचाए रहे

Read Time0Seconds

mitra-300x186
घुटुवन के बल जाए के,
माखन में अंगुरी डूबाए के
कछू खाए रहे,कछू गिराए रहे,
माखन चोर लीला रचाए रहे।

ग्वाल-बालन के टोली बुलाए के,
छींके तक टीला बनवाए के
खुद खाए रहे,सबन के खिलाए रहे,
माखन चोर उड़दंग मचाए रहे।

सब सखन के संग मिलाय के,
जमुना के तट पर डेरा जमाय के
गुलेल से मटकी चटखाए रहे,
नटखट गोपियन के सताए रहे।

गइयन के झुंड लइ जाय के,
सघन कुंज बीच छितराइ के
अधरन पर मुरली सजाय रहे,
मुरारी सबन के सुध बिसराए रहे।

गोपियन संग रास-रंग रचाए के,
राधा प्यारी की निदिंया चुराए के
गोकुल के आंसुअन में बाहाए रहे,
कृष्ण मथुरा जावन की राह बनाए रहे।

                                                                      #लिली मित्रा

परिचय : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर करने वाली श्रीमती लिली मित्रा हिन्दी भाषा के प्रति स्वाभाविक आकर्षण रखती हैं। इसी वजह से इन्हें ब्लॉगिंग करने की प्रेरणा मिली है। इनके अनुसार भावनाओं की अभिव्यक्ति साहित्य एवं नृत्य के माध्यम से करने का यह आरंभिक सिलसिला है। इनकी रुचि नृत्य,लेखन बेकिंग और साहित्य पाठन विधा में भी है। कुछ माह पहले ही लेखन शुरू करने वाली श्रीमती मित्रा गृहिणि होकर बस शौक से लिखती हैं ,न कि पेशेवर लेखक हैं। 

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

लेखा-जोखा

Wed Aug 16 , 2017
आज सोचा कुछ हिसाब हो जाए, कुछ लेखा-जोखा खास हो जाए l    अपनी ज़िंदगी का रोजनामा बना लूं, थोड़ी खतौनी कर लूं,थोड़ा खसरा कर लूं l    बचपन में कितना खेला,क्या खेला, इक चवन्नी का था,वो बाँध का मेला l    गुलाब लच्छे,चवन्नी के, हरी चटनी वाली गाज़र अठन्नी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।