बस एक पेड़ की तरह था

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narendr ary

वो

बस एक पेड़ की तरह था,

ऊँचे कद का

जमीन से आसमान तक

तना ही तना…

एकदम चिकना रंगहीन पारदर्शी

शाखाविहीन

सिर्फ शीर्ष था बहुत घना,

काला अभेद

इतना,जितना मानसून से घिरा काला द्वीप

बारिश की सारी संभावनाओं से रीता

अभिशप्त जैसे सिर्फ उड़ने के लिए

हल्की,काली,गन्दी हवाओं में;

वो मुझे हर जगह मिला l

                                                                                       #डॉ.नरेन्द्र कुमार आर्य

परिचय : डॉ.नरेन्द्रकुमार आर्य का जन्म अगस्त १९७४ में मुरादाबाद(उत्तरप्रदेश) में हुआ हैl आपने उच्च शिक्षा में एम.ए. तथा एमबीए(विपणन),डाक्टरेट किया हुआ हैl आप भारत सरकार के उपक्रम में प्रबंधकीय पद पर कार्यरत हैंl लेखन की बात करें तो,विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं एवं अकादमिक जर्नल्स में हिन्दी  व अंग्रेजी में लेख व कविताएं प्रकाशित हैंl साथ ही कुछ बड़ी प्रतिष्ठित काव्य पत्रिकाओं में भी कविताएँ छापी हैंl एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका द्वारा आपको सम्मान के लिए २०१४ में  नामांकित किया गया थाl पटना विश्वविद्यालय स्थित कृष्णा घाट के समीप आपका निवास हैl 

matruadmin

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तोंद कर

Mon Jul 24 , 2017
सरकारी सम्‍पदा से प्राप्‍त आय से बढ़े हुए पेट को तोंद कहते हैंl तोंद विकास का प्रतीक है। यह प्रतीक उतना ही पुराना है,जितनी पुरानी गरीबी। राज्‍य का विकास जानने के लिए तोंदवालों की गिनती होनी चाहिएlजितने तोंद वाले,उतना उस राज्‍य का विकासl विकास तोंद का प्रतीक और तोंद विकास का…विकास होगा तो भ्रष्‍टाचार होगा,भ्रष्‍टाचार होगा तो तोंद निकलेगी,यानी तोंदवाले को भ्रष्‍ट कहा जा सकता है,लेकिन जरूरी नहीं कि भ्रष्‍ट तोंदवाला हो। मोटा होना और तोंद वाला होना दोनों में फर्क हैl मोटा जन्‍मजात होता है,तोंदवाला ज्‍यादा खा-खाकर तोंदवाले की श्रेणी में आता है। बिना तोंदवाले भी भ्रष्‍ट हो सकते हैं। तोंद हो तो काशी और मथुरा के पंडो जैसी।भरपेट खाना खाने के बाद चार पूड़ी,एक गिलास रायता और एक कटोरा खीर तो चल जाएगी। तोंद पुलिसवालों की मशहूर होती है। पुलिस का पटटा तोंद में इस तरह समा जाता है-जैसे चावल में सफेद कंकड़,धनिए में लीद,फाइल में भ्रष्‍टाचार,सीमेंट में रेत और न जाने क्‍या-क्‍या? अकसर तोंद देखते ही मन के भाव बिगड़ जाते हैं। तोंदवाले से पत्‍नी परेशान होती है और होते हैं- बस वाले,रिक्‍शे वाले और रिश्‍तेवाले। तोंद होना सिद्ध करता है कि,आप आलस के मारे हैं या फिर रिश्‍वत के…,दोनों ही स्थितियां तोंद बढ़ाने में मददगार हैं। तोंद साम्‍प्रदायिक सदभाव काप्रतीक है।तोंद का विकास सम्‍प्रदायवाद से  होता है। जोसभी सम्‍प्रदाय का समान रूप से शोषण करता है,उस शोषण से तोंद का विकास होता है। तोंद गरीब आदमी कीनहीं होतीहै,किसान कीभी नहीं होती,सेना के जवानों की भी नहीं होती,तोंद नेताओं कीहोती है,सेठों की होती है,महिलाओं का पेट होताहै,तोंद नहीं होतीहैlपहाड़ों पर तोंद वाले नहीं दिखाई देते,गांवों में भी तोंद नहीं दिखाई देती,शहरों में नगर पालिका कार्यालय,रेलवे काउंटर,किराने की दुकान,कपड़े की दुकान पर तोंद देखने को आसानी से मिल जाती है। तोंद राष्‍ट्र विकास की मुख्‍यधारा है। राष्‍ट्रीय पशु,राष्ट्रीय पक्षी,राष्‍ट्रीय खेल की तरह हीतोंद को भी राष्‍ट्रीय विकास का प्रतीक बना देना चाहिए। वैसे अब तोंद पदोन्नतिप्रतीक बनाए जाने पर जोर दिया जा रहा है। तोंद होगी तो पदोन्नति नहीं होगी,तोंद नहीं होगी तो पदोन्नति होगी। तोंद,निकम्‍मेपन के प्रतीक के रूप में उभरकर सामने आ रही है। कुछ लोगों की तोंद देखकर लगता है,जैसे उन्‍हें खाने की जरूरत नहीं है तो,किसान का पेट देखकर लगता है,उसका खाना सब तोंदवाले खागएlबचपन में तोंद निकलना कुपोषण का लक्षण और अधेड़ अवस्था में तोंद का निकलना अनियमितता-असंतुलन-पेटू होने का प्रतीक है।तोंद पर विचार-विमर्श होना चाहिए। आदमी की कितनी तोंद होनी चाहिए,तोंद का मानदण्‍ड होना चाहिए। `जीएसटी` की तरह हीमानकीकरण होना चाहिए।४५इंची तोंद पर १२ प्रतिशत जीएसटी,५९ इंची पर १८ प्रतिशत और जिनके पिचके पेट हैं उन्‍हें `करमुक्‍त` रखना चाहिए।एक सर्वे होना चाहिए,जिसमें तोंद वालोंको कितने प्रतिशत महिलाएं पसंद करती है,कितने प्रतिशत लोग तोंद को अच्‍छा मानते हैं। तोंद बढ़ाने के प्रयासों पर कार्यशाला होना चाहिए-देश के लिए तोंदवालों का महत्‍व। यह भी तय होना चाहिए कि,मंत्री की कितनी तोंद होनी चाहिए,संतरी की कितनी,राज्‍यमंत्री की कितनी और प्रधानमंत्री को कितनी तोंदसे काम चलाना चाहिए। अधिकारी और बाबू को `तोंदकर` के दायरे में लाना चाहिए। सबसे ज्‍यादा तोंद कर सेठों से वसूलना चाहिए।         […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।