
Next Post
सब कुछ है, पर 'कुछ' नहीं
Thu Jul 6 , 2017
भौतिकता की चकाचौंध में, दूर कहीं बहुत दूर छूट गई है नैतिकता की, नर्म,मुलायम,धवल चांदनी। दॊलत,शोहरत पद-प्रतिष्ठा, सम्मान के झूठे अहंकार से चौंधियाई आंखें सादगी सरलता, साफगोई और सदाशयता को देखना ही भूल गई है। प्रेम,दया, सहानुभूति, ईमान-धरम, रिश्ते-नाते आपसी भाईचारा,इन्सानियत और परोपकार को देख […]

पसंदीदा साहित्य
-
June 14, 2021
राजा भरथरी चालीसा
-
October 2, 2018
विज्ञान से ईश्वर तक
-
October 7, 2017
ग़ज़ल
-
July 25, 2018
कांग्रेस एकजुटता से ही चढ़ सकती है सत्ता क्स शिखर
