डॉ. श्वेता चौधरी के प्रथम काव्य संग्रह का विमोचन

इंदौर। सृजन संवाद के तत्त्वावधान में डॉ. श्वेता चौधरी के प्रथम काव्य संग्रह ‘संजीवनी एक प्रेरणा’ पुस्तक का लोकार्पण प्रीतमलाल दुआ सभागार में सम्पन्न हुआ।
इस मौके पर अध्यक्षता कर रहे संतोष मोहंती ने कहा कि श्वेता की कविताओं में संपूर्ण स्त्री तत्त्व देखने को मिलता है। उनकी कविताएँ तिमिर में दीप जलाने का कार्य करती हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती वंदना डॉ. शशि निगम ने प्रस्तुत की। स्वागत भाषण संस्था अध्यक्ष डॉ. दीपा मनीष व्यास ने दिया ।
कृतिकार डॉ. श्वेता चौधरी ने अपने भावों को व्यक्त करते हुए कहा कि कविता से पुस्तक बनने की कथा में अनेक लोगों की प्रेरणाएँ हैं। उन्होंने संजीवनी एक प्रेरणा कृति को इस यात्रा का पड़ाव बताया।
पुस्तक पर विस्तृत चर्चा करते हुए साहित्यकार श्रीमती सुषमा व्यास ‘राजनीधि’ ने कहा कि श्वेता चौधरी का काव्य संग्रह संजीवनी एक प्रेरणा सत्यम्, शिवम्, सुंदरम् के निर्मल भावनाओं से निहित है। उनकी कविताओं में नारी मन की कोमल भावनाओं का शिवम् तत्त्व दिखलाई पड़ता है।
मुख्य अतिथि ज्योति जैन ने कहा कि ये कविताएँ जैसे संघर्षों पर विजयी प्राप्त करने पर संजीवनी मिलती हैं, जो जीवन दें वो संजीवनी नहीं होती वरन् जो प्रेरणा दे वो संजीवनी होती है।
कार्यक्रम में सृजन संवाद परिवार के सभी सदस्य और इंदौर की समस्त साहित्यिक संस्थाओं के पदाधिकारी के साथ ही योगेंद्रनाथ शुक्ल, प्रदीप नवीन, सीमा व्यास, डॉ. अर्पण जैन, डॉ. गरिमा दुबे, अंजना मिश्र, मुकेश इंदौरी , आशा मुंशी सहित कई साहित्यकार उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन माधुरी व्यास ‘नवपमा’ ने किया एवं आभार डॉ. प्रणव श्रोत्रिय ने व्यक्त किया। परिवार की ओर से बेटी अनुष्का चौधरी ने अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं।
अतिथियों का स्वागत अर्चना मंडलोई, अरुण ठाकरे, मनोहर दुबे, प्रशांत गौर, दीपक शिरालकर, आर एस चौधरी, जयश्री उपाध्याय, मनोज सेवलकर ने किया ।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।