निमाड़ की लोक कला को राष्ट्रपति भवन की प्रदर्शनी में मिला गौरव

भोपाल। निमाड़ की समृद्ध लोक कला को राष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्राप्त हुआ है। राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल द्वारा आयोजित लोक कला कार्यशाला में मध्यप्रदेश की प्रमुख लोक चित्रकलाओं गोंड एवं भील के साथ निमाड़ की पारंपरिक लोक चित्र शैलियों जिरोती, संजा एवं विजयादशमी दशहरा मांडना का भी सृजन किया गया।

निमाड़ की लोक कलाकार पूर्णिमा चतुर्वेदी ने अपने शिष्यों के साथ इन पारंपरिक लोक चित्रों को तैयार किया। निमाड़ी लोक संस्कृति, परंपरा और लोक आस्थाओं को अभिव्यक्त करने वाले इन चित्रों को 15 से 17 अगस्त 2026 तक राष्ट्रपति भवन में आयोजित प्रदर्शनी में स्थान मिला। यह उपलब्धि न केवल पूर्णिमा चतुर्वेदी और उनके शिष्यों के लिए, बल्कि संपूर्ण निमाड़ की लोक कला एवं संस्कृति के लिए गौरव का विषय है।

राष्ट्रपति भवन की प्रतिष्ठित प्रदर्शनी में निमाड़ी लोक चित्रकला का प्रतिनिधित्व होना इस बात का प्रमाण है कि निमाड़ की सदियों पुरानी लोक परंपराएं आज भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर निमाड़ की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं मातृभाषा उन्नयन संस्थान, देवी श्री अहिल्या स्मृति सेवा संस्थान, महेश्वर, प्रभुत्व अनुरनन प्रतिध्वनि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था, महेश्वर, मध्यप्रदेश तथा म्हारो निमाड़, खंडवा ने श्रीमती चतुर्वेदी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

संस्थाओं ने कहा कि निमाड़ी लोक कला का राष्ट्रपति भवन तक पहुंचना पूरे निमाड़ के लिए गर्व और हर्ष का अवसर है। इस उपलब्धि से नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।