आदिवासियों के लिए वरदान है पेसा एक्ट (पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार अधिनियम)

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15 नवंबर 2022 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर, मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने पंचायत ‘अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार’ अधिनियम ‘पेसा अधिनियम’ नियमावली की पहली प्रति भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को सौंपी।
पेसा अधिनियम 1996 में पंचायतों से संबंधित संविधान के भाग IX के प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित करने के लिए अधिनियमित किया गया था। पंचायतों के अलावा] भाग IX] जिसमें संविधान के अनुच्छेद 243&243 ZT शामिल हैं] में नगर पालिकाओं और सहकारी समितियों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं)। पेसा अधिनियम को अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन की पुष्टि करने के लिए अधिनियमित किया गया था।


मध्य प्रदेश राज्य में यह अधिनियम मुख्य रूप से प्राकृतिक संसाधनों के प्रशासन के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को अधिकार देगा। यह 5,212 पंचायतों में 2,350 गांवों को कवर करते हुए, राज्य के 89 आदिवासी ब्लॉकों में ग्राम सभाओं के माध्यम से स्व-शासन की भी अनुमति देगा। पेसा अधिनियम ग्राम पंचायतों को सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के साथ-साथ लघु वन उपज] भूमि और छोटे जल निकायों से संबंधित मामलों को तय करने की भी अनुमति देगा।


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह ने अधिनियम की कुछ प्रमुख बातों पर प्रकाश डाला। पेसा के तहत] ग्राम सभा के पास शराब की दुकान खोलने की अनुमति देने का अधिकार होगा। बालू खदान] गिट्टी और पत्थर के ठेके देने या नहीं देने का अधिकार भी ग्राम सभा के पास होगा। ग्राम सभा तालाबों के प्रबंधन (मत्स्य पालन) उनमें सिंघाड़े की खेती के लिए सहमति देगी। मनरेगा के पैसे से कौन सा काम करना है] यह तय करने का भी अधिकार होगा और काम का मस्टर रोल भी देखेगा।
आदिवासी क्षेत्रों में केवल लाइसेंसशुदा साहूकारों को ही पैसा उधार देने का अधिकार होगा वह भी निश्चित ब्याज दर पर। इसकी जानकारी ग्राम सभा को देनी। यदि अधिक ब्याज लिया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी] कुछ छोटे विवादों को हल करने के लिए ग्राम सभा को शक्ति प्रदान की जाती है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यदि किसी आदिवासी क्षेत्र में कोई FIR दर्ज की जाती है तो इसकी सूचना ग्राम सभा को दी जानी चाहिए। ग्राम सभा को अधिकार है कि वह किसी भी स्कूल] अस्पताल] आंगनवाड़ी केंद्र] आश्रम विद्यालयों की जांच कर सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोई गैर&आदिवासी व्यक्ति या कोई अन्य व्यक्ति आदिवासियों की जमीन पर धोखाधड़ी] जबरदस्ती] शादी आदि के माध्यम से अवैध रूप से कब्जा करने या खरीदने की कोशिश करता है] तो ग्राम सभा को हस्तक्षेप करने की शक्ति होगी मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ग्राम सभा को सूचित किए बिना कोई व्यक्ति काम के लिए गांव से बाहर नहीं जा सकेगा या कोई बाहरी व्यक्ति काम के लिए गांव में आ सकता है। उन्होंने कहा] यह लोगों के अनावश्यक पलायन को रोकेगा और आदिवासियों को “मानव व्यापार] शोषण या बंधुआ मजदूरी” के अभिशाप से बचाएगा। ग्राम सभा बाजार और मेलों का प्रबंधन भी करेगी। इन नए नियमों को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए हाल ही में पेसा समन्वयकों की नियुक्ति की जाएगी।
सरकार ने पेसा को लागू कर आदिवासी और निर्जन क्षेत्र के लोगों की बेहतरी के लिए एक सुनहरा कदम उठाया है] लेकिन इस अधिनियम के बेहतर प्रशासन से ही आदिवासी लोगों को अपने अधिकारों को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी। यह पारंपरिक शासन प्रणाली में खामियों को ठीक करने का अवसर भी देगा और इसे अधिक लैंगिक-समावेशी और लोकतांत्रिक स्थान बना देगा।

अनुराग पराशर,

अधिवक्ता, इन्दौर, म.प्र

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।