ग़ज़ल: अपना ख़याल रखना

हरदम बदल रहा है, अपना ख़याल रखना,
मौसम बदल रहा है, अपना ख़याल रखना।

था जिस तरह ज़माना वैसा नहीं रहा अब,
कमकम बदल रहा है, अपना ख़याल रखना।

तब्दीलियाँ बहुत हैं,बदला है वक़्त कितना,
पैहम बदल रहा है, अपना ख़याल रखना।

की कोशिशें हज़ारों रिश्ता बना रहे ये,
ताहम बदल रहा है, अपना ख़याल रखना।

ये ज़ख्म ही नया है , नुस्खा गलत नहीं है,
मरहम बदल रहा है, अपना ख़याल रखना।

इसमें बुराई क्या है, हम तुम बदल गये तो,
आलम बदल रहा है, अपना ख़याल रखना।

संजीव प्रभाकर

गांधीनगर, गुजरात

परिचय : संजीव प्रभाकर

जन्म : 3/2/1980
रचनाएँ पत्र पत्रिकाओं और संकलनों में प्रकाशित
संप्रति : भारतीय वायुसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त

सम्पर्क : गाँधीनगर 382021 ( गुजरात )

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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