मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने नागरिकों से माँगे सुझाव

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घर घर हिन्दी’ अभियान भी होगा शुरू

इन्दौर। हिन्दी भाषा के विस्तार और प्रचार के लिए कार्यरत मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा हिन्दी आंदोलन को अधिक प्रभावी एवं लाभकारी बनाने के साथ-साथ हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा कैसे बने और जनसामान्य कैसे हिन्दी से जुड़े! इसके लिए नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

संस्थान द्वारा सोशल मीडिया व बैठकों के माध्यम से जनता से आग्रह किया गया है कि वे बताएँ मातृभाषा उन्नयन संस्थान को हिन्दी के प्रसार के लिए अब आगे क्या करना चाहिए? कैसे हिन्दी भाषा का अत्यधिक प्रचार हो सकता है? व कैसे युवाओं को हिन्दी से जोड़कर आन्दोलन गतिमान किया जा सकता है?

ज्ञात हो कि विगत 4 वर्षों से अधिक समय से संस्थान देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार के लिए कार्यरत है और लगातार हस्ताक्षर बदलो अभियान, एक नगर ग्यारह घर, पुस्तक ग्राम, घर-घर हिन्दी जैसे अभियान के माध्यम से लाखों लोगों को हिन्दी से जोड़ चुका है। संस्थान के प्रकल्प संस्मय प्रकाशन द्वारा पुस्तकों को प्रकाशित कर पाठकों तक उपलब्ध करवाया जा रहा है। हज़ारों साहित्यकार द्वारा संस्थान के अभियान का समर्थन कर हिन्दी प्रचार का कार्य किया गया है।
इस समय 21 लाख लोग मातृभाषा उन्नयन संस्थान के आह्वान पर अपने हस्ताक्षर अन्य भाषाओं से हिन्दी में बदल चुके हैं। संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ हैं। केन्द्रीय कार्यालय दिल्ली व अध्यक्षीय कार्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश है।
संस्थान की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. नीना जोशी, सचिव गणतंत्र ओजस्वी, कोषाध्यक्ष शिखा जैन सहित राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भावना शर्मा, नितेश गुप्ता, सपन जैन काकड़ीवाला, प्रेम मंगल सहित प्रदेश इकाइयाँ भी सतत प्रयत्नशील होकर अभियान को बल दे रही हैं।

अब तक समाज के विभिन्न वर्गों, जैसे शिक्षक, वकील, साहित्यकार, डॉक्टर, राजनीतिज्ञ, प्रशासकीय सेवाओं में कार्यरत लोकसेवकों ने अपने-अपने सुझाव प्रेषित किए हैं, जिनका संयोजन व एकत्रीकरण कर संस्थान की बैठक में रखा जाएगा, जिस पर चर्चा होगी व सर्वसम्मति से उनको अमल में लाया जाएगा।

आपका सुझाव-हिन्दी का विस्तार

विगत 4 वर्षों से अधिक समय से हिन्दी भाषा के प्रचार और विस्तार के लिए कार्यरत मातृभाषा उन्नयन संस्थान आपके सहयोग से हिन्दी के प्रचार में नवाचार चाहता है। हमारा ध्येय है कि हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा बने और जन-जन की भाषा बने हिन्दी।
उपरोक्त विषयान्तर्गत आपके हिन्दी आंदोलन के लिए सुझाव आमंत्रित हैं।
✍🏻 संस्थान को क्या करना चाहिए?
✍🏻 कैसे हिन्दी भाषा का अत्यधिक प्रचार होगा?
✍🏻 कैसे हिन्दी युवाओं को जोड़ेगी?
✍🏻 किस तरह आन्दोलन गतिमान होगा?

इस विषय में आपके सुझाव या तो पोस्ट के कमेन्ट बॉक्स में दे सकते हैं अथवा hindigramweb@gmail.com पर मेल कर भी सकते हैं।

https://www.facebook.com/2072681989650249/posts/3187285454856558/

हिन्दीग्राम #मातृभाषा #डॉअर्पणजैनअविचल #संस्मय #हिन्दी #इन्दौर

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।