
जिंदगीभर धन कमाते रहे
तिजोरियों में सजाते रहे
माता पिता को भूले रहे
रिश्तेनातो से किनारे रहे
ज्यों ज्यो धन बढ़ता रहा
अपनत्व रिश्ता घटता रहा
विकारो में ही फंसे रहे
सद्कर्मो से भी दूर रहे
आया समय जब जाने का
हाथ उनके खाली ही रहे
काश! सद्कर्म किया होता
परलोक तो संवर जाता
आत्मा भी बोझिल न होती
परमात्मा सहज मिल जाता।
#श्रीगोपाल नारसन

