आचार्यश्री से जाने दुनियां

0 0
Read Time1 Minute, 35 Second

आचार्य श्री से जाने दुनियाँ,
ऐसे गुरु हमारे हैं I
नयनों में नेहामृत जिनके, अधरों पर जिनवाणी है।

करका पावन आशीष जिनका,
कंकर सुमन बनाता है I
पग धूली से मरुआंगन भी, नंदनवन बन जाता है।
स्वर्ण जयंती मुनिदीक्षा की,
रोम रोम को सुख देती I
सारे भेद मिटा, जन जन को,
सुख शांति अनुभव देती।।
आचार्य श्री से जाने दुनियाँ,
ऐसे गुरु हमारे हैं I
नयनों में नेहामृत जिनके, अधरों पर जिनवाणी है।।

अकिंचन से चक्रवर्ती तक,
चरण शरण जिनकी आते I
कर के आशीषों से ही बस, अक्षय सुख शांति पाते I
योगेश्वर भी, राम भी इनमें, महावीर से ये दिखते I
सतयुग, द्वापर, त्रेता के भी, नारायण प्रभु ये दिखते I
युग युग तक रज चरण मिले,
यही संजय मन नित मांगे।
आचार्य श्री विद्यासागर का, सदा हो आशीष मम माथे।।
आचार्य श्री से जाने दुनियाँ,
ऐसे गुरु हमारे हैं I
नयनों में नेहामृत जिनके, अधरों पर जिनवाणी है।।

अक्षय तृतीय की आप सभी को बहुत बहुत बधाई और शुभ कामनाएं। उपरोक्त मेरा गीत भजन आचार्य श्री के चरणो में समर्पित है।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन, मुंबई

matruadmin

Next Post

भगवान परशुराम जयंती

Fri May 14 , 2021
ग्रन्थों, वेदों, पुराणों के पन्नों को जब-जब पलटा गया है, इतिहास का कोई नया पन्ना आगे लिखा गया है। उसमें मानव जाति के कल्याण के लिए किसी भी रूप में एक महान योद्धा का अवतरण का उल्लेख मिलता है जिसने मानव जाति को अत्याचारों की आंधी से निकाल कर प्रेम, […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।