साथ मिलकर हम निश्चित ही कोरोना वायरस को हरा सकते हैं

युवा चाहें तो समाज और देश में बड़े से बड़ा बदलाव ला सकते हैं। महामारी के इस भयावह दौर ने अगर परेशानियां दी हैं तो उससे कहीं अधिक सकारात्मकता का संचार भी किया है और इंसानियत का चेहरा उजागर किया है। युवाओं को कुछ करने का मौका मिला तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया और हरसंभव मदद करने में जुटे हुये है।
इस महामारी के दौर में समूचा युवा वर्ग अपने – अपने क्षेत्र के लोगों की मदद करने में जुटा हुआ है.!
इन दिनों एक ऐसी ही युवा शक्ति जो मध्यप्रदेश के सतना जिले के निवासी शिवांकित तिवारी है और वर्तमान में आयुर्वेद स्नातक की पढ़ाई कर रहे है, मगर देश की इस भयावह स्थिति को देखकर अपने कुछ मित्रों के संग मिलकर सोशल मीडिया का सहारा लेकर वो हर संभव जरूरतमंद मरीजों की मदद करने में पूरी तत्परता और तन्मयता के साथ जुटे हुये है। ट्विटर के माध्यम से भी अस्पतालों में बिस्तर, ऑक्सीजन, दवाओं एवं वेंटीलेटर जैसी आवश्यकता संबंधित जानकारी जुटा कर व्हाट्सएप ग्रुप पर अपनी टीम के माध्यम से लोगों की मदद करते है और लोगों को हर संभव मानसिक रूप से सकारात्मक रहने के लिये प्रेरित करते है साथ ही इस महामारी से बचने के लिए लोगों को जागरूक करते है।

शिवांकित का कहना है कि देश में आये इस विकराल संकट से हम सभी को साथ मिलकर लड़ना है और इसको हराना है और अपनी बारी आने पर वैक्सीन अवश्य लगवाना है क्योंकि यह एक मात्र उपाय है जिससे हम इस कोरोना के कोहराम को रोक सकते है और देश को बचा सकतें है एवं हम सभी को मास्क और सामाजिक दूरी जैसे विशेष कर्तव्यों का अक्षरशः पालन करना भी नितांत आवश्यक है।
“नो मास्क – नो एंट्री हर जगह हर वक्त अपनायें,
साथ मिलकर हम सब अब कोरोना को हराये”

शिवांकित तिवारी “शिवा”

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।