
जीवन के हर रंग मे
रंग बदल रहा आदमी
सच से मिलता सुख
फिर भी झूठ बोलता आदमी
जरूरत न होने पर भी
सच झुठला रहा आदमी
झूठ से बड़ा कोई दोष नही
समझ क्यो नही रहा आदमी
झूठ के रंग अनेक
बदल रहा है आदमी
शांति से दूर हो गया
शांति ढूंढ रहा आदमी
हर सन्ताप दूर हो जाएगा
स्वपरिवर्तन करले आदमी
नर से नारायण सा
बन ही जायेगा आदमी।
#श्रीगोपाल नारसन

